विदेश यात्रा पर जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ी परेशानी सामने आई है। क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले छुपे हुए फॉरेन एक्सचेंज (Forex) मार्क-अप चार्ज, जो **3.5%** तक हो सकते हैं, उनकी छुट्टियों के बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं।
छुपे हुए Forex चार्ज का गणित
अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर खर्च होने वाले पैसों पर भारतीय क्रेडिट कार्ड कंपनियां 2% से 3.5% तक का फॉरेन एक्सचेंज मार्क-अप चार्ज लगाती हैं। इसके ऊपर 18% का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) भी जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई यात्री विदेश में ₹1 लाख खर्च करता है, तो इन चार्जेज के कारण उसका बिल कई हजार रुपये बढ़ सकता है, जिसकी जानकारी अक्सर स्टेटमेंट आने के बाद ही मिलती है।
'जीरो-Forex' कार्ड्स की बढ़ती मांग
इस बढ़ते खर्च को देखते हुए, बाजार में 'जीरो-Forex' मार्क-अप वाले क्रेडिट कार्ड्स की मांग तेजी से बढ़ी है। IDFC FIRST Bank का FIRST WOW!, Niyo Global और Scapia जैसे कार्ड्स ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। ये कार्ड्स विदेशी लेन-देन पर कोई अतिरिक्त प्रतिशत-आधारित चार्ज नहीं लगाते, जिससे यात्रियों को पारदर्शिता और कम खर्च का अनुभव मिलता है।
नियम और बाजार के जोखिम
हाल ही में आए यूनियन बजट 2026 में कुछ राहत दी गई है। शिक्षा और मेडिकल खर्चों के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) को घटाकर 2% कर दिया गया है, जिससे थोड़ी राहत मिली है।
हालांकि, यात्रियों को भू-राजनीतिक तनाव और करेंसी मार्केट में अस्थिरता जैसे जोखिमों से सावधान रहना चाहिए। 'जीरो-Forex' का मतलब हमेशा 'जीरो-कॉस्ट' नहीं होता। कुछ कंपनियां असल एक्सचेंज रेट में अंतर (स्प्रेड) बढ़ाकर अपनी कमाई करती हैं। इसलिए, यात्रा से पहले किसी भी पेमेंट ऑप्शन के विज्ञापित मार्क-अप फीस के साथ-साथ वास्तविक कनवर्ज़न रेट की भी तुलना करना जरूरी है।
