Hexagon Nutrition IPO: प्रमोटरों के निकलने से ग्रोथ पर सवाल, एंकर निवेशकों से मिले ₹41.65 करोड़

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AuthorNeha Patil|Published at:
Hexagon Nutrition IPO: प्रमोटरों के निकलने से ग्रोथ पर सवाल, एंकर निवेशकों से मिले ₹41.65 करोड़
Overview

Hexagon Nutrition ने अपने ₹138.87 करोड़ के IPO से पहले एंकर निवेशकों से **₹41.65 करोड़** जुटाए हैं। कंपनी न्यूट्रिशन प्रीमिक्स के क्षेत्र में R&D पर भले ही फोकस करती हो, लेकिन यह पूरा इश्यू प्रमोटर की तरफ से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) है, जिसका मतलब है कि कंपनी की बैलेंस शीट में **0%** पैसा नहीं आएगा।

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एंकर निवेशकों की बुकिंग और बाजार का मिजाज

Hexagon Nutrition की एंकर बुक ने 4 जून को इंस्टीट्यूशनल निवेशकों से ₹41.65 करोड़ जुटाए। पब्लिक इश्यू से पहले यह एक मामूली दिलचस्पी का संकेत है। बंधन म्यूचुअल फंड ने ₹12 करोड़ का सबसे बड़ा निवेश किया, इसके बाद Ampersand Growth Opportunities Fund और CP Capital का नंबर आता है। ₹42-₹45 प्रति शेयर के प्राइस बैंड के साथ, कंपनी प्री-IPO में करीब ₹553 करोड़ का मार्केट कैपिटलाइजेशन हासिल करने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, प्राइमरी मार्केट में चल रही उथल-पुथल के चलते इस खास न्यूट्रिशन प्लेयर के लिए इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का भरोसा परखा जा रहा है।

पूंजीकरण का विरोधाभास

निवेशकों को कॉर्पोरेट ग्रोथ और लिक्विडिटी इवेंट्स के बीच फर्क समझना होगा। यह IPO 100% ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के तौर पर स्ट्रक्चर किया गया है, जिसमें केलकर परिवार अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेच रहा है। चूंकि इस इश्यू से कंपनी को कोई पैसा नहीं मिलेगा, इसलिए इससे मिली रकम मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने, कर्ज घटाने या R&D में निवेश करने के काम नहीं आएगी। बल्कि, यह मौजूदा शेयरधारकों के लिए सिर्फ एग्जिट का जरिया है। कंपनी का रेवेन्यू भले ही ₹281 करोड़ (FY23) से बढ़कर ₹331 करोड़ (FY25) हो गया हो, लेकिन फ्रेश इक्विटी की कमी लिस्टिंग के लॉन्ग-टर्म वैल्यू को कंपनी के लिए सीमित करती है।

मंदी के संकेत (Bear Case)

ऊपरी तौर पर दिख रहे ग्रोथ के आंकड़ों के अलावा, कुछ स्ट्रक्चरल जोखिम भी हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। पहला, कंपनी का बड़े FMCG ग्राहकों पर बहुत ज्यादा निर्भर होना एक बड़ा कस्टमर कंसंट्रेशन रिस्क पैदा करता है। यानी, कुछ चुनिंदा क्लाइंट्स के खरीद फैसलों में बदलाव से रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। दूसरा, इंटरनेशनल एक्सपोजर, जिसे एक ताकत बताया जा रहा है, उसमें भौगोलिक और करेंसी की अस्थिरता का खतरा है, खासकर उज्बेकिस्तान में चल रहे ऑपरेशन्स को लेकर। तीसरा, कुछ जानकारों का मानना है कि कंपनी अपनी तुलना गलत तरीके से बड़े खिलाड़ियों जैसे Nestlé या Zydus Wellness से कर रही है, जो कि स्केल, बैलेंस शीट की गहराई और मार्केट डोमिनेंस के मामले में बुनियादी अंतर को नजरअंदाज करता है। आखिर में, इस OFS के जरिए कई प्रमुख पारिवारिक सदस्यों का कंपनी से बाहर निकलना, मैनेजमेंट के लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट पर सवाल खड़े करता है।

भविष्य का नज़रिया

बाजार के प्रतिभागी फूड फोर्टिफिकेशन प्रीमिक्स मार्केट में कंपनी की खास जगह को, मांगी जा रही प्रीमियम वैल्यूएशन के मुकाबले तौल रहे हैं। 5 से 9 जून तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाले इस IPO में, अब फोकस रिटेल और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर (QIB) कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन लेवल पर रहेगा। माइक्रो न्यूट्रिएंट और क्लिनिकल न्यूट्रिशन पोर्टफोलियो की खास जगह एक हद तक बचाव का काम कर सकती है, लेकिन फ्रेश कैपिटल इंफ्यूजन की कमी और प्रमोटरों की आक्रामक एग्जिट स्ट्रेटेजी यह बताती है कि निवेशकों को लिस्टिंग के उत्साह से ज्यादा मार्जिन्स की स्थिरता और क्लाइंट रिटेंशन रेट्स पर ध्यान देना चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.