सरकारी पैसों की हेराफेरी, सुपरिटेंडेंट पर गिरी गाज
हरियाणा में सरकारी खजाने की लूट का एक बड़ा मामला सामने आया है। डेवलपमेंट और पंचायत डिपार्टमेंट में तैनात सुपरिटेंडेंट नरेश भुवानी को ₹590 करोड़ के एक बड़े फाइनेंशियल फ्रॉड में संलिप्तता के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया है। यह पूरा खेल IDFC First Bank के साथ हुए लेन-देन से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यह एक सुनियोजित आपराधिक साजिश थी, जिसमें सरकारी पैसों को फर्जी बैंकिंग ट्रांजैक्शन के जरिए शेल कंपनियों में पहुंचाया गया।
जांच में हुआ खुलासा, पैसों का हुआ डायवर्जन
फरवरी 2026 में गठित एक जांच समिति ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में रखे गए खातों में भारी अनियमितताएं पाईं। नरेश भुवानी पर आरोप है कि उन्होंने कुछ निजी लोगों के साथ मिलकर एक फर्जी फर्म बनाई और सरकारी रकम को खुर्द-बुर्द किया। सबूतों से पता चला है कि बड़ी रकम उनके निजी खातों में ट्रांसफर की गई और उसका इस्तेमाल निजी प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया।
समिति की रिपोर्ट के बाद, इस मामले की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) को सौंप दी गई। पंचकुला के SV&ACB पुलिस स्टेशन में 23 फरवरी, 2026 को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत FIR दर्ज की गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले में तुरंत और निर्णायक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति और जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही है।
