हरियाणा सरकार की बड़ी कार्रवाई: IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की जांच शुरू
हरियाणा की सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में कथित तौर पर हुए अनधिकृत फंड ट्रांसफर (unauthorized fund transfers) की पड़ताल करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति (high-level committee) का गठन किया है। यह कदम दिनांक 18 फरवरी, 2026 को दोनों संस्थानों को राज्य सरकार के सरकारी कामों से डी-एमपैनल (De-empannelling) करने के निर्देश के बाद उठाया गया है। यह राज्य की बैंकिंग पॉलिसी और उसके अमल को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा का संकेत देता है। समिति, जिसमें वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता भी शामिल हैं, से एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है।
फ्रॉड का खुलासा और मार्केट पर असर
इस जांच की जड़ में IDFC First Bank की चंडीगढ़ ब्रांच में करीब ₹590 करोड़ के एक कथित फ्रॉड (fraud) का खुलासा है, जिसमें हरियाणा सरकार के कुछ अकाउंट्स शामिल थे। बैंक ने बाद में राज्य सरकार को ₹583 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। इस खबर के आते ही IDFC First Bank के शेयरों में दिनांक 23 फरवरी, 2026 को 20% तक की बड़ी गिरावट आई, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) काफी कम हो गया। AU Small Finance Bank के शेयर भी डी-एमपैनल होने के बाद करीब 7.4% गिरे, हालांकि बैंक का कहना है कि शुरुआती जांच में उन्हें कोई वित्तीय प्रभाव या बैंक पर फ्रॉड का संकेत नहीं मिला है, और ट्रांजैक्शन्स (transactions) सरकार द्वारा अधिकृत थे।
बैंकों का तुलनात्मक विश्लेषण और सेक्टर की चिंताएं
पीयर कंपैरिजन (Peer Benchmarking):
IDFC First Bank का P/E रेश्यो 40-45x के बीच है, जबकि AU Small Finance Bank का P/E 30-33x है। IDFC First Bank का मार्केट कैप लगभग ₹60,000-72,000 करोड़ है, वहीं AU Small Finance Bank का मार्केट कैप ₹71,700-77,000 करोड़ के आसपास है।
IDFC First Bank का नेट एनपीए (Net NPA) 0.53% है और ROE 4.24% है। AU Small Finance Bank का नेट एनपीए 0.74% और ROE 14.26% है। तुलनात्मक रूप से, Federal Bank का P/E करीब 17.5x, नेट एनपीए 0.48% और ROE 10.30% है। Ujjivan Small Finance Bank का P/E लगभग 24x, नेट एनपीए 0.6% और ROE 12.4% है।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि IDFC First Bank में प्रमोटर होल्डिंग (0%) नहीं है, जबकि AU Small Finance Bank में 22.8% की प्रमोटर होल्डिंग है, जो गवर्नेंस प्राथमिकताओं में बड़ा अंतर दिखाता है।
सेक्टर ट्रेंड्स और गवर्नेंस गैप्स (Sector Trends and Governance Concerns):
भारतीय बैंकिंग सेक्टर फिलहाल मजबूत दिख रहा है, लेकिन स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) मुनाफा बढ़ाने के लिए सिक्योर लेंडिंग (secured lending) की ओर बढ़ रहे हैं। RBI ने IDFC First Bank फ्रॉड को सिस्टमैटिक रिस्क (systematic risk) नहीं माना है। हालांकि, हरियाणा सरकार के सख्त नियमों और प्राइवेट बैंकों पर निगरानी से पब्लिक फंड मैनेजमेंट (public fund management) में गवर्नेंस गैप्स (governance gaps) सामने आए हैं।
कुछ एनालिस्ट्स (analysts) ने IDFC First Bank के इंटरनल कंट्रोल्स (internal controls) पर चिंता जताई है, लेकिन वे अब भी 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, जो लंबी अवधि की ग्रोथ (growth) में विश्वास दिखाता है। AU Small Finance Bank का कहना है कि ट्रांजैक्शन्स (transactions) अधिकृत थे, फिर भी डी-एमपैनलमेंट से 'भरोसे की कमी' (trust deficit) पैदा हो सकती है।
फ्रॉड का स्केल और ऐतिहासिक सबक
IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का फ्रॉड, बैंक के तिमाही नेट प्रॉफिट से भी ज्यादा है, जो इंटरनल कंट्रोल्स (internal controls) की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह एक 'अलग घटना' (isolated incident) होने के बावजूद, निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
भारत में ऐसे बड़े फाइनेंशियल फ्रॉड, जैसे 1992 का हर्षद मेहता स्कैम (Harshad Mehta Scam) या 2018 का नीरव मोदी-PNB स्कैम (Nirav Modi-PNB scam), मार्केट क्रैश (market crashes) और कड़े रेगुलेटरी रिफॉर्म्स (regulatory reforms) का कारण बने हैं।
हरियाणा सरकार का तुरंत और निर्णायक एक्शन, जैसे बैंकों को डी-एमपैनल करना और नियमों को सख्त करना, पब्लिक फंड के साथ ऑपरेशनल फेल्योर (operational failures) के प्रति उनकी जीरो टॉलरेंस (zero tolerance) को दर्शाता है। इससे मिड-टियर बैंकों और SFBs के लिए 'कंटैजन फियर' (contagion fears) पैदा हो सकता है, खासकर वे जो बड़े सरकारी डिपॉजिट्स (deposits) संभालते हैं। सरकारी फंड्स का प्राइवेट से पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) बैंकों की ओर जाना डिपॉजिट बेस (deposit bases) को भी प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या? जांच और भरोसे की बहाली
एनालिस्ट्स IDFC First Bank की फॉरेंसिक ऑडिट (forensic audit) और रिकवरी की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। कुछ ने टारगेट प्राइस (target price) कम किए हैं, लेकिन 'Buy' की आम सहमति (consensus) बनी हुई है, जो बैंक की लंबी अवधि की संभावनाओं में विश्वास दिखाती है।
AU Small Finance Bank के लिए अब इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स (institutional clients) का भरोसा फिर से जीतना अहम होगा। कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए आउटलुक (outlook) उम्मीद भरा है, लेकिन यह घटना ऑपरेशनल इंटीग्रिटी (operational integrity) और रिस्क मैनेजमेंट (risk management) प्रथाओं पर कड़ी निगरानी की जरूरत को रेखांकित करती है।