हरियाणा सरकार ने AU Small Finance Bank (AU SFB) को सरकारी वित्तीय कामकाज (Financial Business) संभालने की सूची से बाहर कर दिया है। यह बड़ा कदम संदिग्ध धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के चलते उठाया गया है। इस फैसले के बाद बैंक के शेयर की कीमत में शुरुआती गिरावट देखी गई।
इस कार्रवाई के बाद, AU SFB ने तुरंत एक आंतरिक जांच (Internal Review) शुरू कर दी है और कुछ कर्मचारियों को फिलहाल छुट्टी पर भेज दिया गया है। बैंक का कहना है कि उसके सभी खाते 'नो योर कस्टमर' (KYC) नियमों और बैंक की अपनी नीतियों के अनुसार ही खोले गए थे। हरियाणा वित्त विभाग के निर्देशानुसार, सरकारी फंड का बैंक के माध्यम से सारा लेनदेन तुरंत रोक दिया गया है। यह कदम कुछ समय पहले IDFC First Bank के साथ हुई ऐसी ही कार्रवाई जैसा है।
हालांकि, इस नकारात्मक खबर के बावजूद, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने AU Small Finance Bank पर अपना 'Buy' रेटिंग बनाए रखा है। उन्होंने शेयर के लिए ₹1,220 का टारगेट प्राइस भी बरकरार रखा है। Jefferies का यह भरोसा इस बात पर आधारित है कि हरियाणा सरकार से जुड़े डिपॉजिट बैंक के कुल डिपॉजिट का महज़ 0.4% हैं, जो कि लगभग ₹538 करोड़ (21 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार) हैं। ब्रोकरेज फर्म की शुरुआती जांच में बैंक को कोई सीधा वित्तीय नुकसान या धोखाधड़ी नहीं पाई गई है।
Jefferies के वैल्यूएशन मॉडल के अनुसार, बैंक का टारगेट प्राइस-टू-एडजस्टेड बुक वैल्यू (P/ABV) मल्टीपल 3.1x है, जो कि मार्च 2028 तक के लिए अनुमानित ₹387 प्रति शेयर के एडजस्टेड बुक वैल्यू पर आधारित है। इस नजरिए से, 23 फरवरी 2026 को शेयर में आई 6% से ज्यादा की गिरावट शायद अस्थायी है, और बैंक की वित्तीय मजबूती बरकरार है।
AU SFB, भारत के स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) सेक्टर में सबसे बड़ा बैंक है, जो इस सेक्टर में देखी जा रही मजबूत ग्रोथ का फायदा उठा रहा है। फरवरी 2026 तक, बैंक का P/E रेशियो लगभग 29.9x से 33.27x के बीच था। यह वैल्यूएशन भले ही कुछ ज़्यादा लगे, लेकिन भविष्य में 26.3% सालाना की कमाई ग्रोथ के अनुमानों को दर्शाता है। वहीं, Jammu and Kashmir Bank जैसे अन्य बैंकों का P/E रेशियो 5.5x के आसपास है।
बहरहाल, व्यापक भारतीय बैंकिंग सेक्टर में मजबूती दिख रही है और Nifty Bank इंडेक्स नए शिखर बना रहा है। AU SFB का शेयर पिछले एक साल में 90% से भी ज़्यादा भागा है और 19 फरवरी 2026 को ₹1,039.20 का 52-हफ्ते का हाई (52-week high) भी बना चुका है। हाल ही में, RBI से यूनिवर्सल बैंक बनने की सैद्धांतिक मंजूरी (in-principle approval) और विदेशी निवेश की सीमा 74% तक बढ़ाने की इजाजत जैसे रेगुलेटरी कदम बैंक के लिए पॉजिटिव रहे हैं।
हालांकि, हरियाणा सरकार द्वारा बैंक को डी-एम्पानेल करने के फैसले ने AU SFB की आंतरिक गवर्नेंस और कंट्रोल सिस्टम्स पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक का यह कहना कि सभी खाते KYC नियमों के तहत खोले गए थे, सरकारी दावों के सामने जांच का एक बड़ा विषय बन गया है। यह भी सामने आया है कि सरकारी विभाग से शुरू हुआ ट्रांजैक्शन एक 'कस्टमर अकाउंट' में ट्रांसफर हुआ, जिसके बाद सरकारी अकाउंट बंद कर दिया गया।
कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाना, हालांकि एक प्रक्रिया का हिस्सा है, यह आंतरिक खामियों या किसी मिलीभगत की ओर इशारा कर सकता है। यह स्थिति बैंक की प्रतिष्ठा और रेगुलेटरी एक्शन के जोखिम को बढ़ा सकती है। बैंक का अपेक्षाकृत ऊंचा P/E रेशियो (लगभग 33.27x) और गवर्नेंस से जुड़े गुणात्मक जोखिम (qualitative risk) आने वाले समय में वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे चलकर AU SFB के लिए सबसे बड़ी चुनौती हरियाणा सरकार का भरोसा फिर से हासिल करना होगा ताकि उसे फिर से सरकारी कामकाज के लिए एम्पानेल किया जा सके। बैंक अपनी ग्रोथ की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें यूनिवर्सल बैंक बनने के लिए बड़े संस्थानों से सीनियर टैलेंट को हायर करना शामिल है।
कुल मिलाकर, एनालिस्ट्स का AU SFB पर भरोसा बना हुआ है। 'Buy' रेटिंग का कंसेंसस है और औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹1,034.85 है। मार्केट का आम मानना है कि यह घटना एक सीमित प्रभाव वाली है, न कि बैंक की लंबी अवधि की संभावनाओं के लिए कोई बड़ी रुकावट। इस मुश्किल दौर से निकलने और हितधारकों का विश्वास बनाए रखने के लिए बैंक को मजबूत गवर्नेंस, पारदर्शिता और जनता के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।