सरकारी खातों में गड़बड़ी: बैंकों पर पुलिसिया पहरा
यह मामला 30 मार्च, 2026 को पंचकूला में तब गरमाया जब AU Small Finance Bank और Kotak Mahindra Bank की शाखाओं के बाहर हरियाणा पुलिस ने डेरा डाल दिया। एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, बैंक कर्मचारियों को भी अपने परिसरों तक पहुंचने से रोका गया। यह घटना हरियाणा सरकार और निजी बैंकों के बीच सरकारी खातों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद का एक बड़ा पड़ाव है। हालाँकि दोनों बैंकों में अब सामान्य कामकाज फिर से शुरू हो गया है, लेकिन इस कार्रवाई का तत्काल असर काफी बड़ा रहा।
भारी भरकम भुगतान और डी-एम्पैनलमेंट
सूत्रों के मुताबिक, पंचकूला नगर निगम द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में Kotak Mahindra Bank ने कथित अनियमितताओं के संबंध में हरियाणा सरकार को लगभग ₹120 करोड़ का भुगतान किया है। यह कार्रवाई IDFC First Bank द्वारा पहले किए गए ₹645 करोड़ के सेटलमेंट के बाद हुई है। इससे पहले, फरवरी में AU Small Finance Bank को भी इसी तरह के संदेह के चलते राज्य सरकार के कारोबार से डी-एम्पैनल कर दिया गया था, हालांकि बैंक का कहना था कि धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला।
बाज़ार में चिंता और बैंकों पर दबाव
यह स्थानीय विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। 30 मार्च, 2026 को, Nifty Bank इंडेक्स में 2.6% की भारी गिरावट आई और यह इंट्राडे में 50,922.95 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में यह इंडेक्स 15% और 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से 16% गिर चुका है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तेल की कीमतें, महंगाई की चिंताएं, भारतीय रुपये का गिरना और सरकारी बॉन्ड यील्ड का मार्च में 12 महीने के उच्च स्तर 6.96% पर पहुंचना, इन सबने मिलकर बैंकों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, खासकर उन बैंकों के लिए जिनके पास सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश है।
Kotak Mahindra Bank और AU Small Finance Bank पर असर
Kotak Mahindra Bank इस हरियाणा मामले के अलावा भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की जांच के दायरे में रहा है। अप्रैल 2024 में RBI ने बैंक के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सिक्योरिटी और डिजास्टर रिकवरी प्रोटोकॉल में गंभीर कमियों के लिए जुर्माना लगाया था, जिससे नए ग्राहकों को जोड़ने और क्रेडिट कार्ड जारी करने पर रोक लग गई थी। इन पुराने प्रतिबंधों के साथ-साथ पंचकूला की कथित अनियमितताएं, Kotak Mahindra Bank के आंतरिक नियंत्रण पर सवाल खड़े करती हैं।
वहीं, AU Small Finance Bank के लिए हरियाणा सरकार के साथ कारोबार से डी-एम्पैनल होना भविष्य में सरकारी सौदे हासिल करने में चुनौतियां खड़ी कर सकता है। हालांकि विश्लेषक इसे लेकर न्यूट्रल बने हुए हैं, लेकिन इस तरह के स्थानीय विवाद विकास योजनाओं में बाधा डाल सकते हैं और परिचालन लागत बढ़ा सकते हैं। भारत में नियामक निगरानी का बढ़ना, खासकर डिजिटल बैंकिंग, लिक्विडिटी और गवर्नेंस को लेकर, सभी बैंकों के लिए अनुपालन का बोझ बढ़ा रहा है।