Happiest Minds के शेयर में आई भारी गिरावट के बाद कंपनी का मैनेजमेंट अब निवेशकों के बीच चल रही चिंताओं को दूर करने में जुट गया है। ITC Infotech के साथ इस मर्जर डील से कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2028 तक $1 बिलियन का रेवेन्यू हासिल करना है, लेकिन 15 महीने की लंबी प्रक्रिया और इंटीग्रेशन रिस्क ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
वैल्यूएशन पर क्या है मैनेजमेंट का रुख?
अगस्त 31, 2026 को मर्जर की घोषणा के बाद से Happiest Minds के शेयर में 15% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि डील में रिटेल शेयरधारकों को कोई कैश प्रीमियम नहीं दिया गया है। इस पर सफाई देते हुए कंपनी ने बताया कि वैल्यूएशन ऑपरेटिंग प्रॉफिट के 15.1 गुना पर तय किया गया है, जो हालिया परफॉर्मेंस के मुकाबले 11% का प्रीमियम है। कंपनी का कहना है कि यह मूल्यांकन स्वतंत्र डायरेक्टर्स और फाइनेंशियल एडवाइजर्स की सलाह के बाद ही तय हुआ है।
$1 बिलियन का बड़ा टारगेट
इस मर्जर के बाद ITC Ltd की हिस्सेदारी 73.4% हो जाएगी और वे प्रमोटर की भूमिका में होंगे। नई संयुक्त कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2028 तक सालाना $1 बिलियन का रेवेन्यू छूना है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कंपनी को करीब 12.5% की एनुअल ग्रोथ रेट बनाए रखनी होगी। कंपनी का इरादा अपनी वर्कफोर्स को 19,000 और क्लाइंट बेस को 800 से ऊपर ले जाने का है।
डील की जटिलताएं और चुनौतियां
यह मर्जर 15 महीने की लंबी अवधि में पूरा होगा, जो निवेशकों के लिए अनिश्चितता का कारण बना हुआ है। पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी: पहले प्रमोटर अशोक सूटा और उनके साथियों द्वारा 22.1% हिस्सेदारी की बिक्री, और फिर शेयर-स्वैप मर्जर।
अगले कुछ महीनों में निवेशकों की नजर Competition Commission of India, SEBI और NCLT से मिलने वाली मंजूरियों पर टिकी होगी। इसके साथ ही, दो अलग कॉर्पोरेट कल्चर को एक साथ जोड़ना और मौजूदा क्लाइंट्स को बनाए रखना मैनेजमेंट के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
