सरकारी कंपनी HUDCO ने 2030 तक अपनी लोन बुक को दोगुना करके ₹3 लाख करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस विस्तार के लिए कंपनी सालाना डिस्पर्सल में **25%** की वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके साथ ही, HUDCO ग्रीन और सोशल बॉन्ड जैसे नए साधनों से फंड जुटाने के साथ-साथ शहरी स्थानीय निकायों को इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार करने में भी मदद करेगी।
लोन बुक डबल करने की तैयारी
हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HUDCO) ने अगले 7 सालों में यानी 2030 तक अपनी लोन बुक को बढ़ाकर करीब ₹3 लाख करोड़ करने की योजना बनाई है। यह लक्ष्य इसलिए भी अहम है क्योंकि कंपनी ने पिछले 30 महीनों में ही अपनी लोन बुक को दोगुना करके ₹1.6 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया था। इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी इस चालू फाइनेंशियल ईयर में सालाना लोन डिस्पर्सल ₹60,000 करोड़ से ₹65,000 करोड़ के बीच रहने का अनुमान लगा रही है, जो पिछले साल के ₹52,000 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है।
फंड जुटाने की नई रणनीति
इस बड़े विस्तार के लिए HUDCO पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर सोच रही है। कंपनी फिलहाल कम लागत वाले येन-डिनॉमिनेटेड लोन का इस्तेमाल करती है, लेकिन अब वह डॉलर-डिनॉमिनेटेड डेट, म्युनिसिपल बॉन्ड और ग्रीन बॉन्ड जैसे विकल्पों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है। फंड जुटाने के इन नए तरीकों से कंपनी अपने फंड की लागत को ऑप्टिमाइज़ करना चाहती है, जो कि कॉम्पिटिटिव लेंडिंग माहौल में मुनाफा बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।
शहरी निकायों के लिए 'अर्बन इन्वेस्ट विंडो'
सिर्फ लोन देने तक ही सीमित न रहकर, HUDCO अपने 'अर्बन इन्वेस्ट विंडो' इनिशिएटिव के जरिए शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए एक स्ट्रेटेजिक पार्टनर के तौर पर उभर रही है। इस प्रोग्राम का फोकस नगर पालिकाओं को अधिक 'बैंकेबल' बनाने पर है, ताकि वे बेहतर प्रोजेक्ट तैयार कर सकें और अपने फाइनेंशियल मैनेजमेंट को सुधार सकें। इन निकायों को ऐसे प्रोजेक्ट्स तैयार करने में मदद करके जो सख्त इन्वेस्टमेंट क्राइटेरिया को पूरा करते हों, HUDCO अपने लिए व्यवहार्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का एक पाइपलाइन तैयार कर रही है और साथ ही स्थानीय सरकारी स्तर पर वित्तीय अनुशासन को भी बढ़ावा दे रही है।
नए इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स में विस्तार
शहरी विकास के राष्ट्रीय रुझानों के साथ तालमेल बिठाते हुए, HUDCO अब क्लाइमेट-रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दे रही है। कंपनी टेंपल बॉन्ड जैसे नए और खास फाइनेंसिंग क्षेत्रों में भी कदम रख रही है, जैसा कि उज्जैन और नाथद्वारा के प्रोजेक्ट्स में देखा गया है। इसके अलावा, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर्स में भी ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी आंध्र प्रदेश (अमरावती प्रोजेक्ट के लिए), बिहार और असम सहित विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि अपनी भौगोलिक पहुंच को बढ़ाया जा सके।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि कंपनी अपनी एसेट क्वालिटी को बनाए रखते हुए लोन बुक का कितनी तेजी से विस्तार कर पाती है। एक सरकारी संस्था होने के नाते, HUDCO का प्रदर्शन सीधे तौर पर पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय सेहत से जुड़ा हुआ है। ग्रीन और सोशल बॉन्ड जैसे जटिल फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट्स की ओर बढ़ना लागत में फायदे का सौदा हो सकता है, लेकिन इसके लिए एनवायरनमेंटल और सोशल प्रोजेक्ट की कंप्लायंस की निगरानी में मजबूत एग्जीक्यूशन की जरूरत होगी। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि क्या कंपनी वर्ल्ड बैंक या एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसे बहुपक्षीय संस्थानों से फंडिंग हासिल कर पाती है, क्योंकि ऐसी पार्टनरशिप अक्सर कम उधार लागत और उच्च प्रोजेक्ट मानकों का संकेत देती है। इसके अतिरिक्त, आने वाली तिमाही रिपोर्टों में डिस्पर्सल ग्रोथ की गति और इसका कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर पड़ने वाला असर भी महत्वपूर्ण होगा।
