HUDCO का मुनाफा 35% उछला, ₹851 करोड़ पर पहुंचा Q1 FY27 में

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AuthorNeha Patil|Published at:
HUDCO का मुनाफा 35% उछला, ₹851 करोड़ पर पहुंचा Q1 FY27 में

HUDCO ने नए वित्त वर्ष की शानदार शुरुआत की है। कंपनी ने जून 2026 तिमाही में अपने नेट प्रॉफिट में **35%** की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो **₹851.11 करोड़** रहा। यह बड़ी उछाल रिकॉर्ड लोन सैंक्शन और संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के चलते संभव हुई है।

Detailed Coverage

HUDCO के नतीजों का पूरा ब्योरा

Housing and Urban Development Corporation (HUDCO) ने नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही (30 जून 2026 को समाप्त) में ₹851.11 करोड़ का दमदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह मुनाफा ₹630.23 करोड़ था, जो 35.05% की शानदार बढ़ोतरी दिखाता है। कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में भी 26.55% का इजाफा हुआ और यह ₹3,717.17 करोड़ तक पहुंच गया।

रिकॉर्ड लोन सैंक्शन और बेहतर एसेट क्वालिटी

इस बेहतरीन प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा कारण कंपनी के लोन बुक का 28.8% बढ़कर ₹1.73 लाख करोड़ हो जाना है। इस तिमाही में HUDCO ने ₹65,485 करोड़ के लोन मंजूर किए, जो पिछले साल की तुलना में 91% ज़्यादा हैं। वहीं, लोन का वितरण (Disbursement) भी 28% बढ़कर ₹16,377 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इससे यह साफ होता है कि कंपनी देश भर में शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने पर जोर दे रही है।

प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने में कंपनी ने अपनी बोरिंग कॉस्ट को भी 6.95% तक लाने में सफलता पाई है, जो पिछली तिमाही में 7.17% थी। साथ ही, कंपनी ने अपने बैलेंस शीट को और मजबूत किया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs), यानी अटके हुए लोन, घटकर 0.96% रह गए, जो एक साल पहले 1.34% थे। नेट NPA रेशियो केवल 0.048% है, जो सेक्टर में सबसे कम में से एक है।

सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?

HUDCO एक सरकारी संस्थान है जो हाउसिंग और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करता है। इसकी परफॉर्मेंस सरकारी खर्चों और प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग की मांग से जुड़ी है। चूंकि कंपनी उधार लेकर लोन देती है, इसलिए ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव इसके प्रॉफिट मार्जिन को सीधे प्रभावित कर सकता है। कंपनी ने फंड की लागत कम रखते हुए डिस्बर्समेंट बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है, जिससे अच्छे मार्जिन बने हुए हैं।

निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में भी लोन सैंक्शन की यह गति बनाए रख पाती है या नहीं, क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी की संभावना बनी रहती है। फिलहाल एसेट क्वालिटी मजबूत दिख रही है, लेकिन लोन बुक बढ़ने के साथ NPAs को कम बनाए रखना एक चुनौती होगी। मैनेजमेंट का कहना है कि यह परफॉर्मेंस उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो और इंफ्रा पर फोकस का नतीजा है। अगले अपडेट्स प्रोजेक्ट कमीशनिंग और ब्याज दरों के माहौल पर निर्भर करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.