HSBC ने 2026 के पहले नौ महीनों में भारतीय G3 बॉन्ड और सिंडिकेटेड लोन मार्केट में अपनी बादशाहत कायम की है। कंपनी का प्रॉफिट **4%** बढ़कर **$965 मिलियन** पहुंच गया है और अब बैंक इक्विटी ब्रोकिंग में दोबारा एंट्री की तैयारी कर रहा है।
बाजार पर मजबूत पकड़
साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में HSBC ने भारतीय कॉर्पोरेट फंडरेजिंग के क्षेत्र में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। बैंक न केवल G3 बॉन्ड जारी करने में सबसे आगे रहा, बल्कि सिंडिकेटेड लोन मार्केट में भी 21% की हिस्सेदारी हासिल की है। यह प्रदर्शन भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़े ग्लोबल पार्टनर के रूप में बैंक की बढ़ती साख को दर्शाता है।
मुनाफे की रफ्तार और बड़े क्लाइंट्स
बैंक की इस कामयाबी के पीछे उसके मजबूत फाइनेंशियल नतीजे हैं। बैंक के भारतीय ऑपरेशंस का प्रॉफिट 4% बढ़कर $965 मिलियन दर्ज किया गया। इस फंड के जरिए बैंक ने Waaree RTL, Piramal Pharma और RateGain जैसी दिग्गज कंपनियों को जटिल फाइनेंसिंग और कर्ज रिफाइनेंसिंग में मदद की है।
इक्विटी स्पेस में दबदबा
इक्विटी मार्केट की बात करें तो HSBC ने कुल $5 बिलियन के 6 बड़े IPO में अपनी अहम भूमिका निभाई है। इसमें Jio का $4 बिलियन का ऑफर और NSE का $2.4 बिलियन का इश्यू शामिल है। इन डील्स के दम पर बैंक ने बड़े इक्विटी ऑफर्स में 84% की वैल्यू शेयर हासिल की है।
नई राह: ब्रोकिंग मार्केट में वापसी
अब बैंक का फोकस वेल्थ मैनेजमेंट और इक्विटी सर्विसेज पर है। 13 साल के लंबे अंतराल के बाद, HSBC अपने HSBC InvestDirect Securities लाइसेंस के जरिए इक्विटी ब्रोकिंग में दोबारा कदम रखने जा रहा है। फिलहाल बैंक के पास Jio Platforms और Zetwerk समेत 12 बड़े IPO के मैंडेट्स हैं।
चुनौतियां और रिस्क
हालांकि, राह आसान नहीं है। बैंक के होलसेल पोर्टफोलियो पर क्रेडिट रिस्क का साया है, और आर्थिक सुस्ती आने पर क्रेडिट लॉस बढ़ने की संभावना है। साथ ही, इक्विटी ब्रोकिंग मार्केट में पहले से मौजूद घरेलू और ग्लोबल खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
