HSBC के CEO Georges Elhedery का मानना है कि गल्फ देश 2030 तक 'Strait of Hormuz' पर अपनी निर्भरता कम कर लेंगे। इस रूट को बायपास करने के लिए बड़े स्तर पर जमीनी लॉजिस्टिक्स और पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जिस 'Strait of Hormuz' से गुजरने वाले तेल पर निर्भर है, अगले 5 साल में उसका रणनीतिक महत्व कम हो सकता है। HSBC के ग्रुप CEO Georges Elhedery ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि गल्फ देश अब वैकल्पिक जमीनी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस रणनीति का मुख्य मकसद क्षेत्रीय व्यापार को राजनीतिक तनावों से सुरक्षित रखना है।
वैकल्पिक रास्तों की तैयारी
दशकों से 'Strait of Hormuz' ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण बॉटलनेक रहा है। यहाँ किसी भी तरह की हलचल से ऑयल की कीमतों में उछाल और शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हो जाता है। इससे बचने के लिए गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देश अरब प्रायद्वीप में बड़े स्तर पर पाइपलाइन और जमीनी गलियारों में निवेश कर रहे हैं। यह सिर्फ एक अस्थायी फैसला नहीं, बल्कि एक लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति है जिसके लिए अरबों डॉलर का कैपिटल कमिटमेंट किया गया है।
बैंकों के लिए बड़े अवसर
यह इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव ग्लोबल बैंकों के लिए एक नया फ्रंटियर बन गया है। मध्य-पूर्व में मजबूत पैठ रखने वाला HSBC इस पूरे डेवलपमेंट को अपनी ग्रोथ स्ट्रेटजी का हिस्सा मान रहा है। बैंक इन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी फाइनेंसिंग आर्किटेक्चर तैयार करने में जुटा है। निवेशकों के नजरिए से, मजबूत क्षेत्रीय उपस्थिति वाले बैंक आने वाले समय में इन भारी-भरकम प्रोजेक्ट्स की फंडिंग और एडवाइजरी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
जोखिम और निगरानी
इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूशन रिस्क, लागत बढ़ना (Cost overruns) और रेगिस्तानी इलाकों में तकनीकी जटिलताएं प्रमुख बाधाएं हो सकती हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे प्रोजेक्ट की समय-सीमा, फंडिंग स्ट्रक्चर और पाइपलाइन के कमीशन होने की खबरों पर पैनी नजर रखें। अंततः, सफलता इस पर निर्भर करेगी कि ये नए नेटवर्क पारंपरिक समुद्री मार्ग का कितना प्रभावी विकल्प बन पाते हैं।
