HSBC Holdings ने भारत में फिर से अपना इक्विटी ब्रोकिंग बिजनेस शुरू करने का ऐलान किया है। बैंक अपनी सब्सिडियरी HSBC InvestDirect Securities के जरिए रिटेल और अफ्लुएंट निवेशकों को लुभाने की तैयारी में है, जो भारतीय बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी और IPO क्रेज का फायदा उठाना चाहता है।
फिर से पुरानी राह पर HSBC
13 साल पहले यानी 2013 में HSBC ने भारतीय रिटेल ब्रोकरेज और डिपॉजिटरी सर्विसेज से हाथ पीछे खींच लिए थे, लेकिन अब बैंक ने वापसी का रास्ता चुन लिया है। बैंक अपनी मौजूद सब्सिडियरी, HSBC InvestDirect Securities (India) Private Limited, के डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेगा। इससे बैंक को नए रेगुलेटरी अप्रूवल के झंझटों से मुक्ति मिलेगी और वह सीधे सर्विस लॉन्च करने पर फोकस कर पाएगा।
बैंक की रणनीति क्या है?
भारत में HSBC के पास सबसे बड़ी बैलेंस शीट है। जहां दुनिया के अन्य विदेशी बैंक जैसे Citibank और Deutsche Bank अपने रिटेल बिजनेस को समेट रहे हैं, वहीं HSBC ने हाल ही में 20 नई ब्रांच खोलने की अनुमति ली है। बैंक अपनी मौजूदगी को केवल बैंकिंग तक सीमित न रखकर GIFT City में भी बढ़ा रहा है, ताकि क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट के लिए बेहतर विकल्प दिए जा सकें।
बाजार की कड़ी चुनौती
आज का मार्केट 2013 जैसा नहीं है। भारत में अब डिस्काउंट ब्रोकरों का बोलबाला है, जो कम कीमत पर ट्रेडिंग की सुविधा दे रहे हैं। HSBC के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान बनाना है। बैंक का फोकस मुख्य रूप से उन धनी निवेशकों (Affluent Clients) पर होगा, जो सस्ते ट्रेडिंग मॉडल के बजाय पर्सनल एडवाइजरी और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट एक्सेस को प्राथमिकता देते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक अपनी वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज को इस नए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के साथ कैसे जोड़ता है।
