HSBC India ने अपने ग्राहकों को बड़ी खुशखबरी दी है। बैंक 15 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक अपने सभी क्रेडिट कार्ड पर फॉरेन एक्सचेंज (Forex) मार्कअप फीस को खत्म कर रहा है। इस खास ऑफर का फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो विदेश यात्रा करते हैं या विदेशी वेबसाइट्स पर खरीदारी करते हैं।
विदेश यात्रा और ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए अच्छी खबर!
HSBC India ने अपने क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को राहत देते हुए एक खास ऑफर पेश किया है। बैंक 15 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक अपने सभी क्रेडिट कार्ड पर लगने वाली फॉरेन एक्सचेंज (Forex) मार्कअप फीस को पूरी तरह से माफ कर रहा है। इस एक महीने के प्रमोशनल पीरियड में, अगर आप विदेश में कहीं भी खरीदारी करते हैं या विदेशी वेबसाइट्स से ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो आपको स्टैंडर्ड मार्कअप फीस नहीं देनी होगी।
किन कार्ड्स पर मिलेगा फायदा?
यह सुविधा HSBC Premier, Taj, Live+, TravelOne, और Platinum जैसे कई पॉपुलर क्रेडिट कार्ड्स पर लागू होगी। यह ध्यान रखना जरूरी है कि HSBC Prive और HSBC RuPay Cashback जैसे कुछ कार्ड्स पर फॉरेक्स मार्कअप फीस पहले से ही माफ है, यह एक स्थायी सुविधा है। लेकिन इस नए ऑफर से बैंक के बाकी क्रेडिट कार्ड यूजर्स को भी एक महीने के लिए यह सुविधा मिल जाएगी।
DCC फीस पर भी बैंक का रुख?
इसके अलावा, HSBC India ने डायनामिक करेंसी कन्वर्जन (DCC) फीस को लेकर भी अपनी पॉलिसी को फिर से स्पष्ट किया है। जब आप विदेश में पेमेंट करते हैं, तो मशीन अक्सर आपसे लोकल करेंसी या रुपये में पेमेंट करने का ऑप्शन पूछती है। लोकल करेंसी में पेमेंट करना हमेशा सस्ता होता है। HSBC की पॉलिसी के तहत, ग्राहक लोकल करेंसी में पेमेंट करने का ऑप्शन चुन सकते हैं और उन्हें इसके लिए कोई अतिरिक्त कन्वर्जन चार्ज नहीं देना होगा। यह सुविधा ऑफर पीरियड के अलावा भी जारी रहेगी।
बैंक का मकसद और बाजार में प्रतिस्पर्धा
बैंक का यह कदम खासतौर पर उन प्रीमियम और ट्रैवल-फोकस्ड ग्राहकों को लुभाने के लिए है, जो अक्सर विदेश यात्रा करते हैं। भारतीय क्रेडिट कार्ड मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, बैंक ऐसी सुविधाएं देकर ग्राहकों का भरोसा जीतना चाहते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि, इस ऑफर से लेन-देन की लागत तो कम हो जाएगी, लेकिन यह विदेश में खर्च से जुड़े सभी शुल्कों को खत्म नहीं करता है। वैश्विक करेंसी एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव (Fluctuations) का असर अभी भी दिखेगा, जिससे रुपये में अंतिम भुगतान राशि बदल सकती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन अभी भी मौजूदा रेगुलेटरी नियमों, जैसे कि Liberalised Remittance Scheme (LRS) और Tax Collected at Source (TCS) गाइडलाइन्स के अधीन होंगे। साथ ही, बैंकिंग शुल्कों पर लगने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जैसे टैक्स भी लागू रहेंगे।
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने कार्ड के खास नियमों और शर्तों को ध्यान से पढ़ लें ताकि वे इस प्रमोशनल पीरियड के दौरान अपने अंतरराष्ट्रीय खर्चों पर पड़ने वाले असर को समझ सकें।
