HSBC ने भारतीय स्टार्टअप्स के लिए बनाए अपने **$1 बिलियन** के इनोवेशन फंड का आधा हिस्सा महज एक साल में खर्च कर दिया है। बैंक अब B2B और कंज्यूमर टेक सेक्टर पर फोकस कर रहा है और भारत में **500** नए कॉर्पोरेट क्लाइंट्स जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
आक्रामक रणनीति और निवेश का गणित
HSBC अपनी पारंपरिक कॉर्पोरेट लेंडिंग से हटकर अब भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश में है। बैंक ने पिछले एक साल में अपने $1 बिलियन के इनोवेशन फंड का $50 करोड़ हिस्सा स्टार्टअप्स को दिया है। बैंक की रणनीति साफ है—इन स्टार्टअप्स को शुरुआती दौर में बैंकिंग सुविधा और लोन देकर उनके साथ मजबूत रिश्ता बनाना, ताकि भविष्य में इन्हें बड़े कॉर्पोरेट क्लाइंट्स में बदला जा सके।
किन सेक्टरों में है फोकस?
बैंक ने अपने निवेश का लगभग 70% से 80% हिस्सा B2B और B2C कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लगाया है। बाकी का पैसा एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी फर्म्स को दिया गया है। बैंक का मानना है कि यही वो सेक्टर हैं जो भारत में डिजिटाइजेशन की लहर को लीड कर रहे हैं।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, स्टार्टअप्स को फंडिंग देना पारंपरिक लोन से बिल्कुल अलग है। इन कंपनियों का 'कैश बर्न' (Cash Burn) ज्यादा होता है और ये पूरी तरह से इक्विटी राउंड्स पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में बैंक के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने एनपीए (NPA) रेशियो को कंट्रोल में रखने की होगी। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर है कि बैंक इन हाई-रिस्क स्टार्टअप्स के कैश फ्लो को कैसे मॉनिटर करता है।
आगे क्या?
जिस रफ्तार से बैंक ने फंड का इस्तेमाल किया है, उसे देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में बैंक अपनी निवेश सीमा (Allocation) को और बढ़ा सकता है। बैंक ने अगले 12 महीनों में 500 नए कॉर्पोरेट क्लाइंट्स जोड़ने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी कामयाबी इसी इनोवेशन बैंकिंग प्लेटफॉर्म के प्रदर्शन पर टिकी है।
