HDFC Pension ने इस फाइनेंशियल ईयर में 21 लाख नए NPS सब्सक्राइबर्स जोड़ने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 14 लाख के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। इस ग्रोथ के पीछे डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन में बढ़ोतरी और इक्विटी में निवेश की आजादी जैसे बड़े बदलाव हैं।
सब्सक्राइबर्स बेस में बड़ी उछाल
रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर निवेशकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। जहां मार्च में कुल सब्सक्राइबर्स बेस 2.17 करोड़ था, वहीं जुलाई तक यह आंकड़ा बढ़कर 2.26 करोड़ पर पहुंच गया है। HDFC Pension अब इसे 21 लाख की नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में है।
क्यों बढ़ रही है लोकप्रियता?
PFRDA के 'मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क' ने गेम बदल दिया है। अब निवेशकों के पास यह आजादी है कि वे अपने NPS फंड का 100% तक हिस्सा इक्विटी में लगा सकते हैं। इससे NPS अब पारंपरिक सरकारी योजनाओं के मुकाबले अधिक आकर्षक और कॉम्पिटिटिव हो गया है।
इसके अलावा, PFRDA ने डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन को 0.03% से बढ़ाकर 0.3% कर दिया है। इस कदम ने वित्तीय सलाहकारों को भी इस प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे रिटेल निवेशकों तक पहुंच आसान हुई है।
गिग इकोनॉमी पर नजर
HDFC Pension अब Zomato और Urban Company जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर गिग वर्कर्स को टारगेट कर रही है। अब गिग वर्कर्स ₹5,000 तक की साप्ताहिक डिपॉजिट आसानी से कर सकते हैं, जिससे निवेश की प्रक्रिया में आने वाली रुकावटें खत्म हो गई हैं।
टैक्स का फायदा और रिस्क फैक्टर
कॉर्पोरेट निवेशकों के लिए सेक्शन 80CCD(2) के तहत मिलने वाला टैक्स बेनेफिट अब भी सबसे बड़ा 'ड्राइवर' है, जहां कंपनियां 14% तक सैलरी कंट्रीब्यूशन को टैक्स-फ्री रख सकती हैं।
हालांकि, HDFC Bank के शेयरहोल्डर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह पूरा बिजनेस रेगुलरेशंस पर टिका है। PFRDA की तरफ से कमीशन या इन्वेस्टमेंट लिमिट में कोई भी बदलाव इस सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल सकता है। साथ ही, मार्केट में बढ़ती प्रतियोगिता मार्जिन पर दबाव बना सकती है।
