HDFC Bank Share Price: नतीजों में दम, पर शेयर क्यों लुढ़का? जानें वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
HDFC Bank Share Price: नतीजों में दम, पर शेयर क्यों लुढ़का? जानें वजह
Overview

HDFC Bank के निवेशकों के लिए मार्च तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। बैंक ने लोन (Advances) और डिपॉजिट्स (Deposits) में दमदार ग्रोथ दिखाई है, साथ ही क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो (Credit-to-Deposit Ratio) भी सुधरकर **95.31%** हो गया है। लेकिन इन अच्छे नंबर्स के बावजूद, शेयर अभी भी बियर मार्केट (Bear Market) के दबाव से उबर नहीं पा रहा है।

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नतीजों में दम, पर शेयर क्यों है परेशान?

HDFC Bank ने मार्च 2026 तिमाही के लिए अपने बिजनेस अपडेट में ऑपरेशनल स्ट्रेंथ का प्रदर्शन किया है। मार्च 2026 के अंत तक, बैंक के ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) सालाना आधार पर 12.0% बढ़कर करीब ₹29.60 लाख करोड़ हो गए। वहीं, पीरियड-एंड एडवांसेज (Period-end Advances) 10.2% की बढ़त के साथ लगभग ₹30.58 लाख करोड़ रहे। खास बात यह है कि यह ग्रोथ ऐसे समय में आई जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर में धीमी लोन ग्रोथ की उम्मीद थी।

डिपॉजिट्स में तूफानी तेजी

एडवांसेज से भी ज्यादा तेजी डिपॉजिट्स में देखने को मिली। कुल डिपॉजिट्स सालाना आधार पर 14.4% की उछाल के साथ करीब ₹31.06 लाख करोड़ तक पहुंच गए। इस ग्रोथ की वजह से बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो घटकर 95.31% रह गया, जो पिछले 98.5% से काफी कम है। बैंक के एवरेज CASA (Current Account Savings Account) डिपॉजिट्स भी 10.8% बढ़कर ₹9.18 लाख करोड़ हो गए। यह मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ, जो लोन यील्ड पर दबाव को कम करने में मदद कर सकती है, बैंक के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।

निवेशकों का बदलता समीकरण: FPIs बेच रहे, घरेलू निवेशक खरीद रहे

शेयरहोल्डिंग पैटर्न में बड़े बदलाव दिखे हैं। मार्च तिमाही में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने बिकवाली का रुख अपनाया और अपनी हिस्सेदारी 47.67% से घटाकर 44.05% कर दी। इसी बिकवाली को शेयर में आई हालिया गिरावट का एक कारण माना जा रहा है। वहीं, डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स (Domestic Mutual Funds) ने FPIs की बिकवाली का बड़ा हिस्सा खरीदा और अपनी हिस्सेदारी 26.66% से बढ़ाकर 29.54% कर ली। रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है।

सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग और वोलेटिलिटी का बढ़ना

NSE के आंकड़ों के अनुसार, मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) पर सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग (Speculative Trading) में भारी इजाफा हुआ है। 1 अप्रैल 2026 तक HDFC Bank पर MTF पोजिशंस 47% बढ़कर ₹1,518 करोड़ हो गई हैं। यह रिटेल निवेशकों द्वारा बढ़ी हुई ट्रेडिंग एक्टिविटी का संकेत देता है, जिससे स्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है। टेक्निकल चार्ट्स पर भी स्टॉक ओवरसोल्ड टेरिटरी (Oversold Territory) में दिख रहा है। RSI लगभग 33 के आसपास है, जो शॉर्ट-टर्म बाउंस की संभावना तो दिखाता है, लेकिन मौजूदा बियरिश ट्रेंड की पुष्टि भी करता है। स्टॉक अपने 52-हफ्ते के हाई ₹1,020 से करीब 26% गिरकर मार्च 2026 के आखिर में ₹727 के निचले स्तर पर आ गया था।

गवर्नेंस के मुद्दे बना रहे दबाव

ऑपरेशनल परफॉरमेंस के बावजूद, HDFC Bank का शेयर अपने पीयर्स (Peers) के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रहा है। 18 मार्च 2026 को एथिकल कंसर्न (Ethical Concerns) के चलते पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty का इस्तीफा एक बड़ा झटका था। इसके अलावा, एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स की कथित मिस-सेलिंग (Mis-selling) को लेकर अन्य एग्जीक्यूटिव्स पर संभावित कार्रवाई की खबरें भी सामने आई थीं। इन गवर्नेंस इश्यूज ने इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का भरोसा हिला दिया है।valuation की बात करें तो HDFC Bank का P/E रेश्यो 15-16 के आसपास है, जो ICICI Bank (15.3-19.4) और Kotak Mahindra Bank (19-30+) से कम है, लेकिन SBI (11-12) से ज्यादा है।

एनालिस्ट्स बंटे हुए

विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। JPMorgan ने HDFC Bank को 'Overweight' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹1,083.33 रखा है, जो 44% से ज्यादा की अपसाइड दिखा रहा है। वहीं, कुछ अन्य एनालिस्ट्स इसे 'Reduce' की रेटिंग दे रहे हैं। ICICI Securities जैसे ब्रोकरेज फर्म्स ने ₹1,120 तक का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह दिखाता है कि मार्केट एक तरफ बैंक की मजबूत फंडामेंटल्स और पोस्ट-मर्जर (Post-merger) रीसेट को खरीदने का मौका देख रहा है, तो दूसरी ओर गवर्नेंस रिस्क और बैलेंस शीट एडजस्टमेंट को लेकर सतर्क है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.