HDFC Bank Share Price: निवेशकों में हड़कंप! Funding Gap और Governance Scandal के चलते शेयर **25%** गिरा

BANKINGFINANCE
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AuthorMehul Desai|Published at:
HDFC Bank Share Price: निवेशकों में हड़कंप! Funding Gap और Governance Scandal के चलते शेयर **25%** गिरा
Overview

HDFC Bank के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। मार्च तिमाही की बिजनेस अपडेट में बैंक का लोन ग्रोथ तो **17%** बढ़कर **₹25 लाख करोड़** हो गया, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ उम्मीद से काफी पीछे रह गई। इस वजह से बैंक का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो **108%** तक पहुंच गया और CASA रेशियो भी घटकर **37-38%** रह गया। इन फंडिंग दिक्कतों और AT-1 बॉन्ड जैसे governance issues के चलते बैंक के शेयर में भारी गिरावट आई है।

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फंडिंग का बढ़ता दबाव

HDFC Bank की मार्च तिमाही की बिजनेस अपडेट साफ दिखाती है कि बैंक के लोन और डिपॉजिट के बीच एक बड़ा गैप बन गया है। बैंक का ग्रॉस एडवांस (Gross Advances) सालाना आधार पर 17% बढ़कर करीब ₹25 लाख करोड़ पहुंच गया, जिसकी मुख्य वजह रिटेल और SME सेगमेंट से मजबूत मांग रही। वहीं, कुल डिपॉजिट (Deposits) सिर्फ करीब ₹23.5 लाख करोड़ तक ही पहुंच पाए।

यह बढ़ता गैप बैंक के क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (Credit-Deposit Ratio) को 106-108% तक ले गया है। इस तरह के ऊंचे रेशियो वाले बैंकों को अक्सर महंगी होलसेल फंडिंग (Wholesale Funding) पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आता है।

करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट (CASA) रेशियो का 37-38% तक गिर जाना (पिछले तिमाही में 38-39% था) इस बात का संकेत है कि बैंक को कम लागत वाले डिपॉजिट आकर्षित करने में मुश्किल हो रही है। पूरे इंडस्ट्री में CASA रेशियो में भारी गिरावट देखी गई है। प्राइवेट बैंकों का CASA रेशियो दिसंबर तक 47% से घटकर 37.2% हो गया था, जिससे उन्हें महंगे टर्म डिपॉजिट (Term Deposits) और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (Certificates of Deposit) का सहारा लेना पड़ रहा है। यह फंडिंग माहौल, भले ही लोन ग्रोथ अच्छी हो, प्रॉफिटेबिलिटी के लिए चुनौतियां पैदा करता है।

वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट और प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ना

निवेशकों ने HDFC Bank के वैल्यूएशन को लेकर अपनी राय बदली है, जिससे इसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में प्रीमियम में खासी कमी आई है। अप्रैल की शुरुआत तक, HDFC Bank का फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक (P/B) रेशियो करीब 1.8 गुना पर ट्रेड कर रहा था। यह ICICI Bank के करीब 2.65 गुना और Axis Bank की वैल्यूएशन से काफी कम है।

बैंक के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, मार्च तक यह साल-दर-साल (YTD) करीब 25% गिर चुका था और अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा था। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल भी अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे है, कई बार तो यह ICICI Bank और Axis Bank से भी नीचे चला गया। हाल ही में, निवेशक भावना में बदलाव के कारण बैंक का मार्केट वैल्यू करीब ₹1.7 लाख करोड़ घट गया है।

Governance Concerns ने बढ़ाई चिंता

निवेशकों की चिंता सिर्फ फंड की कमी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि Governance Issues ने भी इसमें आग में घी का काम किया है। इनमें मिड-मार्च में पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty का अचानक इस्तीफा भी शामिल है। Chakraborty ने बैंक के मूल्यों के साथ असहमति का हवाला दिया था, खासकर AT-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग (Mis-selling) के मामले पर देरी से की गई प्रतिक्रिया के चलते। यह मामला बैंक की दुबई ब्रांच से जुड़ा था।

इस घोटाले में कथित तौर पर हाई-रिस्क वाले बॉन्ड की NRIs को गलत तरीके से बिक्री की गई थी। Dubai Financial Services Authority (DFSA) ने कार्रवाई करते हुए नए कस्टमर जोड़ने पर रोक सहित कई कदम उठाए। तीन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स को टर्मिनेट भी किया गया। Chakraborty ने मैनेजमेंट की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को 'तकनीकी चूक' (Technical Lapse) माना, न कि आचरण की समस्या (Conduct Problem)। उन्होंने नोट किया कि जवाबदेही तय करने में आठ साल लग गए। यह अवधि उनके मुख्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में Governance के मामले में कम स्थिर दिखती है।

एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली

शेयर में गिरावट और Governance Issues के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स को HDFC Bank में वैल्यू नजर आ रही है। JPMorgan ने हाल ही में HDFC Bank को 'Overweight' रेटिंग दी है। उनका मानना है कि इसमें एक आकर्षक रिस्क-रिवॉर्ड बैलेंस है और फॉरवर्ड P/B मल्टीपल 16 साल के निचले स्तर पर है। एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट ₹1,010 से ₹1,240 तक हैं, जो संभावित उछाल का संकेत देते हैं। JPMorgan को उम्मीद है कि लोन ग्रोथ में रिकवरी आएगी और महंगे उधारों को सस्ते डिपॉजिट से बदलने पर Return on Assets (ROA) में सुधार होगा।

हालांकि, कुछ अन्य एनालिस्ट्स अभी भी सतर्क हैं। कुछ ने स्टॉक को 'Reduce' रेट किया है, जो Competition से लगातार मार्जिन दबाव और सब्सिडियरीज (Subsidiaries) के वैल्यूएशन को मुख्य कारण बता रहे हैं। भविष्य में बैंक कितनी अच्छी तरह डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ा पाता है और अपनी फंडिंग को स्थिर कर पाता है, यह उसकी प्रॉफिटेबिलिटी और निवेशकों के भरोसे के लिए अहम होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.