HDFC Bank और Ujjivan Small Finance Bank में बड़े बदलाव की आहट है। दोनों ही बैंकों के CEO के पद छोड़ने के बाद अब बोर्ड नए नेतृत्व की तलाश में जुट गया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
बैंकिंग सेक्टर में इस समय बड़ी हलचल है, क्योंकि दो प्रमुख बैंक अब अपने भविष्य की कमान संभालने के लिए नए लीडर्स की तलाश कर रहे हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में भारी उतार-चढ़ाव है और Reserve Bank of India की सख्ती भी लगातार बनी हुई है।
HDFC Bank की चुनौती
बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन ने तीसरे कार्यकाल के लिए दावेदारी पेश नहीं करने का फैसला किया है, उनका कार्यकाल 26 अक्टूबर, 2026 को खत्म होगा। साल 2026 की शुरुआत से अब तक HDFC Bank का शेयर लगभग 28% तक गिर चुका है। अब बोर्ड पर एक ऐसे उत्तराधिकारी को चुनने का दबाव है जो बैंक के मर्जर के बाद के इंटीग्रेशन, डिपॉजिट ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन को दुरुस्त कर सके।
Ujjivan SFB का अचानक फैसला
उधर, Ujjivan Small Finance Bank में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है। CEO संजीव नौटियाल ने 1 सितंबर, 2026 को स्वास्थ्य कारणों से अचानक रिटायरमेंट ले लिया। बैंक ने तत्काल प्रभाव से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कैरोल फुरटाडो को एक्टिंग CEO बनाया है ताकि कामकाज में कोई रुकावट न आए।
निवेशकों के लिए मायने
लीडरशिप में बदलाव का मतलब है बैंक की रणनीति में बड़ा बदलाव। चूँकि सभी टॉप-लेवल नियुक्तियों के लिए Reserve Bank of India की मंजूरी जरूरी है, इसलिए नए CEO के चयन में समय लगना तय है। शेयरधारकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक अपनी डिपॉजिट ग्रोथ और गवर्नेंस के मानकों को कैसे मैनेज करते हैं, खासकर तब जब रेगुलेटरी उम्मीदें पहले से कहीं ज्यादा सख्त हैं।
