चेयरमैन के इस्तीफे से शेयर बाजार में गिरावट
19 मार्च 2026 को, HDFC Bank के शेयर में बड़ी गिरावट आई। शेयर 9% तक नीचे गिर गए, जो कि पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर रहा। इस गिरावट की वजह बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन Atanu Chakraborty का अचानक इस्तीफा है। Atanu Chakraborty ने अपने इस्तीफे में कहा है कि बैंक में कुछ "तरीके और प्रथाएं" (happenings and practices) थीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता (values and ethics) के खिलाफ थीं।
इस इस्तीफे से वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया है। HDFC Bank के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) रात भर में 7% से ज्यादा गिर गए। 19 मार्च को अकेले इस शेयर में गिरावट से निवेशकों को ₹1.03 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ।
मैनेजमेंट की सफाई पर निवेशकों का शक
अंतरिम चेयरमैन Keki Mistry ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा कि बोर्ड में "कोई पावर स्ट्रगल" नहीं है और सभी एकजुट हैं। Mistry ने यह भी संकेत दिया कि यह इस्तीफा चेयरमैन और मैनेजमेंट के बीच "रिलेशनशिप इश्यूज" (relationship issues) के कारण हो सकता है।
हालांकि, Mistry की इस सफाई से निवेशक संतुष्ट नहीं दिख रहे। Atanu Chakraborty ने जहां इस्तीफे में नैतिकता का हवाला दिया, वहीं मैनेजमेंट इसे व्यक्तिगत मतभेद बता रहा है। बैंक ने यह भी स्वीकार किया कि चेयरमैन ने अपने नैतिक चिंताओं के विशिष्ट विवरण बोर्ड को नहीं बताए थे। इस जानकारी की कमी के कारण निवेशकों का शक और बढ़ गया है। बाजार यह मान रहा है कि अनकहे गवर्नेंस रिस्क (governance risks) हैं, बजाय इसके कि यह केवल व्यक्तिगत मतभेद का मामला हो।
वैल्यूएशन और सेक्टर का दबाव
फिलहाल, HDFC Bank का पी/ई रेश्यो (P/E ratio) करीब 19.99 है, जो कि कुछ बड़े बैंकों के मुकाबले ज्यादा है। State Bank of India (SBI) का पी/ई रेश्यो लगभग 11.0 से 11.8 है, जबकि ICICI Bank का पी/ई रेश्यो 18.54 से 19.38 के बीच है।
बैंकिंग सेक्टर पहले से ही दबाव में है। भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई के डर से Nifty Bank इंडेक्स पिछले दो हफ्तों में 11.2% गिर चुका है। ऐसे माहौल में, एक बड़े बैंक में नेतृत्व की अस्थिरता से चिंताएं और बढ़ जाती हैं।
अनसुलझे सवाल और आगे का रास्ता
Atanu Chakraborty का इस्तीफे में "नैतिकता" का जिक्र करना कोई आम बात नहीं है। बैंक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि किन "तरीकों और प्रथाओं" के कारण चेयरमैन ने ऐसा कड़ा कदम उठाया। भले ही मैनेजमेंट RBI से मिले भरोसे और ऑपरेशनल निरंतरता का आश्वासन दे रहा हो, लेकिन बाजार यह जानना चाहता है कि असल मुद्दा क्या है।
जब तक इस मामले पर कोई और स्पष्टता नहीं आती, या नया चेयरमैन नियुक्त नहीं हो जाता, तब तक अनिश्चितता बनी रह सकती है। विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ इसे "स्ट्रॉन्ग बाय" (Strong Buy) बता रहे हैं, वहीं JPMorgan जैसे विश्लेषक "न्यूट्रल" (Neutral) रेटिंग के साथ ₹1,090 का टारगेट प्राइस दे रहे हैं।