HDFC Bank के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। बैंक ने जून 2026 तिमाही के लिए अपने बिज़नेस अपडेट जारी किए हैं, जिसमें ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) में पिछले साल के मुकाबले **15.4%** की शानदार बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़कर **₹30.61 ट्रिलियन** हो गया है। वहीं, बैंक के डिपॉजिट्स (Deposits) में भी **14.7%** का इजाफा देखा गया है।
HDFC Bank के शेयर में क्यों आई तेज़ी?
मंगलवार को HDFC Bank के शेयर में सकारात्मक चाल देखी गई। इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर 1.5% से ज़्यादा चढ़कर ₹843 के स्तर पर पहुंच गए। पिछले दो दिनों से शेयर में यह तेज़ी जारी है, जिसका मुख्य कारण बैंक द्वारा 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए जारी किए गए शुरुआती बिज़नेस अपडेट हैं।
क्या हैं मुख्य आंकड़े?
बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि ग्रॉस एडवांसेज पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले 15.4% बढ़कर ₹30.61 ट्रिलियन पर पहुंच गए। वहीं, कुल डिपॉजिट्स में भी 14.7% की मज़बूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लगभग ₹30.61 ट्रिलियन के स्तर पर है। इसके अलावा, बैंक के एडवांसेज अंडर मैनेजमेंट (Advances Under Management), जिसमें विभिन्न क्रेडिट फैसिलिटीज़ शामिल हैं, 12.4% बढ़कर ₹31.27 ट्रिलियन हो गए, जो पिछले साल ₹27.82 ट्रिलियन थे।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
ये आंकड़े बताते हैं कि HDFC Bank प्रतिस्पर्धी बैंकिंग माहौल में भी क्रेडिट और डिपॉजिट ग्रोथ को बनाए रखने में सक्षम है। हालांकि, एडवांसेज में हुई मज़बूत बढ़ोतरी को बाज़ार के जानकारों ने सराहा है, लेकिन कुल मुनाफे पर इसके असर को लेकर चर्चा जारी है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal के एनालिस्ट्स का मानना है कि लोन ग्रोथ उम्मीद से थोड़ा बेहतर रहा और डिपॉजिट ग्रोथ भी उम्मीदों के अनुरूप रहा। लेकिन, उन्हें प्रॉफिट मार्जिन में लगभग 2 बेसिस पॉइंट की मामूली कमी आने की आशंका है। बैंकिंग सेक्टर में मार्जिन पर दबाव एक आम बात है, क्योंकि बैंक डिपॉजिट जुटाने की लागत और लोन से होने वाली आय के बीच संतुलन बनाते हैं।
आगे क्या?
साल 2024 की शुरुआत से अब तक HDFC Bank के शेयर में लगभग 16% की गिरावट आई है, जबकि Nifty 50 इंडेक्स 6% गिरा है। शेयर की रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक आने वाली तिमाहियों में अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) को कैसे मैनेज करता है और क्या डिपॉजिट ग्रोथ क्रेडिट डिमांड के साथ तालमेल बिठा पाती है। निवेशकों को आने वाले फुल क्वार्टर फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर भी नज़र रखनी चाहिए, जिनसे एसेट क्वालिटी, प्रोविज़न कवरेज और मौजूदा इंटरेस्ट रेट माहौल में बैंक की रणनीति को समझने में मदद मिलेगी।
