HDFC Bank Share Price: 2 साल के निचले स्तर पर ₹726 पर लुढ़का शेयर, FPI ने घटाई हिस्सेदारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
HDFC Bank Share Price: 2 साल के निचले स्तर पर ₹726 पर लुढ़का शेयर, FPI ने घटाई हिस्सेदारी

HDFC Bank के शेयरों में मंगलवार को भारी गिरावट आई और यह ₹726.50 के दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में शेयर **12%** टूटा है, क्योंकि विदेशी निवेशकों (FPIs) ने लगातार पांचवीं तिमाही में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। हालांकि, बैंक के जून तिमाही के नेट प्रॉफिट में **5%** की वृद्धि हुई है, लेकिन नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और फंडिंग कॉस्ट को लेकर चिंताएं बाजार की धारणा पर हावी हैं। निवेशक अब मार्जिन में सुधार और डिपॉजिट ग्रोथ के संकेतों पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

क्यों गिरी HDFC Bank की शेयर कीमत?

मंगलवार को HDFC Bank के शेयर ₹726.50 के स्तर को छूते हुए दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गए। पिछले एक महीने में स्टॉक में 12% की गिरावट आई है। यह गिरावट तब आई है जब बाजार में बड़ी हलचल मची हुई है। कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक यह शेयर 27% गिर चुका है, जबकि बेंचमार्क सेंसेक्स में इतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। यह दिखाता है कि देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर पर भारी दबाव है, खासकर बैंक के मर्जर के बाद के ट्रांजीशन को लेकर।

FPIs की लगातार बिकवाली

फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) लगातार HDFC Bank के शेयर बेच रहे हैं। जून 2026 तिमाही के अंत तक, FPIs की हिस्सेदारी घटकर 41.83% रह गई। यह लगातार पांचवीं तिमाही है जब विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम की है। वैश्विक संस्थागत निवेशकों की इस बिकवाली का शेयर की कीमतों पर भारी असर पड़ा है। वहीं, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर सेंटीमेंट को सहारा देने की कोशिश की है, लेकिन वे बिकवाली के दबाव को पूरी तरह से कम नहीं कर पाए हैं।

नतीजों का मिला-जुला असर

फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। बैंक ने ₹19,060 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 5% ज्यादा है। हालांकि, निवेशकों का ध्यान नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर है, जो 3.26% रहा। यह एक अहम चिंता का विषय है क्योंकि यह कॉम्पिटिटिव बैंकिंग माहौल में डिपॉजिट जुटाने की लागत को दर्शाता है।

मर्जर के बाद की चुनौतियां

2023 के मर्जर के बाद से HDFC Bank के सामने एक बड़ी चुनौती है: ऊंचे ग्रोथ रेट को बनाए रखते हुए फंड की लागत को मैनेज करना। बैंक फिलहाल हाई क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो से जूझ रहा है, जिसका मतलब है कि उसने डिपॉजिट के रूप में जमा किए गए पैसे का एक बड़ा हिस्सा लोन के रूप में बांट दिया है। इस वजह से, बैंक को लोन ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए आक्रामक तरीके से नए डिपॉजिट जुटाने होंगे, जिससे ब्याज की लागत बढ़ सकती है और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

ब्रोकरेज की मिली-जुली राय

ब्रोकरेज फर्मों की राय बंटी हुई है, लेकिन ज्यादातर लॉन्ग-टर्म नजरिए की सलाह दे रही हैं। कुछ एनालिस्ट्स ने मार्जिन में नरमी और फंड की लागत में धीमी रिकवरी की संभावना पर चिंता जताई है। वहीं, अन्य बैंक की मजबूत बिजनेस फ्रेंचाइजी और पुराने, महंगे कर्ज के मैच्योर होने पर बेहतर रिटर्न रेशियो की क्षमता की ओर इशारा कर रहे हैं। बाजार की धारणा लीडरशिप में बदलाव, जैसे कि नए चेयरमैन की नियुक्ति, से भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि निवेशक स्थिरता की तलाश में हैं।

आगे क्या देखना होगा?

शेयरधारकों के लिए सबसे अहम चीजें बैंक की डिपॉजिट जुटाने की कोशिशों का ट्रेंड और आने वाली तिमाहियों में नेट इंटरेस्ट मार्जिन में किसी भी सुधार पर निर्भर करेंगी। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि मैनेजमेंट कैसे लोन ग्रोथ को डिपॉजिट मिक्स को बेहतर बनाने की जरूरत के साथ संतुलित करने की योजना बना रहा है, जो फंड की लागत को कम करने और प्रॉफिटेबिलिटी की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.