HDFC Bank के शेयरों में आज दबाव देखने को मिला। खबर है कि सितंबर तिमाही में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी घटाकर **39.40%** कर दी है। लोन और डिपॉजिट में ग्रोथ के बावजूद, ऊंचे फंड कॉस्ट और मार्जिन पर दबाव से निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
जुलाई-सितंबर 2026 की शेयरहोल्डिंग डेटा सामने आने के बाद HDFC Bank के शेयरों में बिकवाली का दौर देखा गया। डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी में 2.43% की कमी की है, जिससे यह घटकर 39.40% रह गई है।
बिजनेस परफॉर्मेंस और डिपॉजिट का गणित
बैंक के प्रोविजनल बिजनेस आंकड़ों को देखें तो सितंबर तिमाही में ग्रॉस एडवांसेज 16.3% बढ़कर ₹32.20 लाख करोड़ पहुंच गए हैं, जबकि टोटल डिपॉजिट में 18.8% का उछाल आया है और यह ₹33.28 लाख करोड़ हो गया है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि सस्ते माने जाने वाले CASA डिपॉजिट्स में केवल 10.8% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि महंगे टाइम डिपॉजिट्स 22.8% की रफ्तार से बढ़े हैं। फंडिंग कॉस्ट बढ़ने का सीधा असर बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर पड़ रहा है।
लीडरशिप में बड़ा बदलाव और चुनौतियां
साल 2026 की शुरुआत से अब तक यह शेयर लगभग 29% तक गिर चुका है। अब सबकी निगाहें 27 अक्टूबर 2026 पर हैं, जब अनूप बागची (Anup Bagchi) नए मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO का पदभार संभालेंगे। वे शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे। मैनेजमेंट में हो रहे इस बड़े बदलाव और अमेरिकी अदालतों में चल रहे पुराने मुकदमों के कारण शेयर पर दबाव बना हुआ है। अब देखना होगा कि नई लीडरशिप मार्जिन और ग्रोथ की चिंताओं को कैसे सुलझाती है।
