जून 2026 तिमाही में HDFC Bank में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर **36.3%** कर ली है। विदेशी फंडों की बिकवाली के बीच यह बदलाव काफी अहम है, खासकर तब जब शेयर में इस साल **27%** की गिरावट आई है और अक्टूबर 2026 में CEO शशिधर जगदीशन के रिटायर होने की खबरें हैं।
HDFC Bank के शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, जून 2026 तिमाही में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी DII ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 36.3% कर ली है, जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली को बैलेंस कर रहे हैं। गौरतलब है कि सितंबर 2025 में FPI की हिस्सेदारी 48.39% थी, जो अब घटकर 41.83% रह गई है।
बाजार में दबाव का दौर
दलाल स्ट्रीट पर HDFC Bank के लिए साल 2026 अब तक मुश्किल भरा रहा है। साल की शुरुआत से अब तक शेयर में करीब 27% की गिरावट दर्ज की गई है। जहां घरेलू म्यूचुअल फंड इसे लॉन्ग टर्म के लिए एक मौके के रूप में देख रहे हैं, वहीं विदेशी पूंजी की निकासी भारतीय इक्विटी में ग्लोबल फंड्स द्वारा किए जा रहे रीबैलेंसिंग की ओर इशारा करती है।
लीडरशिप में होने वाला बदलाव
बैंक एक बड़े ट्रांजिशन दौर से गुजर रहा है। बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने 26 अक्टूबर 2026 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है। निवेशकों के लिए नेतृत्व को लेकर बनी यह अनिश्चितता चिंता का विषय है। मार्केट की नजरें बोर्ड के सक्सेशन प्लान पर टिकी हैं, क्योंकि गिरावट के इस दौर में मजबूत लीडरशिप ही निवेशकों का भरोसा वापस ला सकती है।
ऑपरेशन्ल चुनौतियां और फोकस
बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती मर्जर के बाद बढ़ा हुआ 'क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो' है। बैंक पर कर्ज के मुकाबले तेजी से डिपॉजिट जुटाने का दबाव है, जिसमें बैंकिंग सेक्टर का कड़ा मुकाबला भी एक बड़ी बाधा है। इसके अलावा, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर भी दबाव बना हुआ है, जिससे रिटेल और स्मॉल बिजनेस लोन की ग्रोथ को बनाए रखना बैंक के लिए चुनौती है। मार्केट के जानकारों के बीच बैंक के पुराने गवर्नेंस मुद्दों और मिस-सेलिंग के आरोपों की चर्चा भी बनी हुई है।
आगे क्या देखें?
आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ और लोन बुक विस्तार के संतुलन पर नजर रखनी चाहिए। क्या बैंक NIM को स्टेबल कर पाएगा और अपनी लिक्विडिटी पोजीशन सुधार सकेगा? नए उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा भी बैंक के सेंटिमेंट को बदलने में अहम भूमिका निभाएगी।
