HDFC Bank ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। बैंक का नेट प्रॉफिट उम्मीदों के मुताबिक **4.7%** बढ़कर **₹19,510 करोड़** रहा। हालांकि, एसेट क्वालिटी में सुधार के बावजूद इन्वेस्टर्स बैंक के बदलते फंडिंग मिक्स पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
HDFC Bank के नतीजों ने मार्केट की उम्मीदों को पूरा किया है। बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 9.7% बढ़कर ₹34,619 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है।
एसेट क्वालिटी और लोन ग्रोथ
बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो में सुधार देखा गया है, जो पिछली तिमाही के 1.17% से घटकर सितंबर के अंत तक 1.11% रह गया है। बैंक का क्रेडिट कॉस्ट रेशियो भी 0.44% पर स्थिर बना हुआ है। ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) में 16.3% की मजबूती देखी गई है, जो कुल ₹32,19,500 करोड़ हो गए हैं। खास बात यह है कि स्मॉल और मिड-मार्केट एंटरप्राइज लोन में 23.5% का बड़ा उछाल आया है।
डिपॉजिट और मार्जिन का गणित
इन्वेस्टर्स के लिए चिंता का विषय डिपॉजिट का मिक्स है। बैंक के कुल डिपॉजिट 18.8% बढ़कर ₹33,27,400 करोड़ हो गए हैं। हालांकि, CASA (करेंट और सेविंग्स अकाउंट) डिपॉजिट में सिर्फ 10.8% की बढ़ोतरी हुई, जबकि टाइम डिपॉजिट (फिक्स्ड डिपॉजिट) 22.8% बढ़े हैं। टाइम डिपॉजिट महंगे होते हैं, जिससे बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बना हुआ है, जो इस तिमाही में 3.16% रहा।
कैपिटल और आउटलुक
बैंक की बैलेंस शीट काफी मजबूत है, जिसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 18.9% है, जो बेसल III (Basel III) मानकों से काफी ऊपर है। 39.1% के कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो के साथ बैंक अपने खर्चों को मैनेज कर रहा है, लेकिन भविष्य में डिपॉजिट की बढ़ती लागत और मार्जिन को बनाए रखना बैंक के लिए बड़ी चुनौती होगी।
