HDFC Bank के Q2 नतीजों में डिपॉजिट ग्रोथ ने लोन विस्तार को पीछे छोड़ दिया है। **$11.5 बिलियन** के FCNR(B) इनफ्लक्स ने बैंक की लिक्विडिटी को मजबूती दी है, जबकि बैंक अब नए मैनेजमेंट के दौर में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है।
HDFC Bank ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई दूसरी तिमाही के लिए अपने प्रोविजनल बिजनेस अपडेट जारी कर दिए हैं। बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ 18.8% (Year-on-Year) बढ़कर ₹33.28 लाख करोड़ पर पहुंच गई है, जबकि ग्रॉस एडवांसेज (Loans) 16.3% की बढ़त के साथ ₹32.20 लाख करोड़ रहे। यह क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है।
फॉरेन करेंसी इनफ्लो का खेल
बैंक की इस शानदार डिपॉजिट परफॉर्मेंस के पीछे $11.5 बिलियन के FCNR-B डिपॉजिट्स का हाथ है, जिसे RBI की स्पेशल स्वैप सुविधा के जरिए जुटाया गया। बैंक ने इस फंड को बेकार नहीं बैठने दिया; ओवरसीज ब्रांचों ने $5.7 बिलियन के लोन बांटे, $3.1 बिलियन के स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए और $2.5 बिलियन के सीनियर अनसिक्योर्ड बॉन्ड इश्यू किए।
फंडिंग मिक्स और मार्जिन पर दबाव
इस लिक्विडिटी के बावजूद बैंक का फंडिंग मिक्स बदल रहा है। टाइम डिपॉजिट्स में 22.8% का उछाल आया है, जिनकी ब्याज लागत अक्सर महंगी होती है। वहीं, कम लागत वाले CASA डिपॉजिट्स केवल 10.8% बढ़े हैं। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कहीं महंगी टर्म डिपॉजिट्स के कारण बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव न बढ़ जाए।
नेतृत्व में बदलाव
तिमाही नतीजों के साथ-साथ बैंक में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अनूप बागची 27 अक्टूबर, 2026 से नए मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO का पद संभालेंगे। बाजार की नजर अब इस पर है कि नया नेतृत्व बैंक के लोन-टू-डिपॉजिट मिक्स को कैसे मैनेज करता है और प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे बरकरार रखता है।
