HDFC Bank विदेशी बाजार से 1 अरब डॉलर से ज़्यादा जुटाने की तैयारी में है। यह पैसा डॉलर-डिनॉमिनेटेड बॉन्ड के ज़रिए उठाया जाएगा और इसके लिए बैंक अपनी GIFT City ब्रांच का इस्तेमाल करेगा। इस जल्दबाजी की वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक खास फॉरेन एक्सचेंज स्वैप फैसिलिटी को 31 अगस्त, 2026 को बंद करने का फैसला है। गुरुवार को बैंक के शेयर में 1% की तेजी देखी गई, जो LIC द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाने की खबर से और मज़बूत हुई।
विदेशी बाज़ारों में HDFC Bank का बड़ा कदम
HDFC Bank अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से 1 अरब डॉलर से ज़्यादा की रकम जुटाने के लिए तैयार है। यह फंड डॉलर-डिनॉमिनेटेड बॉन्ड के ज़रिए जुटाया जाएगा। इस कवायद के लिए बैंक अपनी GIFT City स्थित ब्रांच का इस्तेमाल करेगा, जो एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है। बैंक तीन साल और पांच साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहा है, जिसमें हर ट्रेंच से कम से कम 500 मिलियन डॉलर जुटाने का लक्ष्य है।
RBI की स्वैप फैसिलिटी का असर
इस कर्ज जारी करने का समय RBI द्वारा तय की गई एक खास डेडलाइन से जुड़ा है। केंद्रीय बैंक ने FCNR(B) डिपॉजिट के लिए अपनी विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप फैसिलिटी को मूल रूप से 30 सितंबर की जगह अब 31 अगस्त, 2026 तक बंद करने का फैसला किया है। यह फैसिलिटी भारतीय बैंकों को फॉरेन करेंसी डिपॉजिट की हेजिंग लागत को बेहतर दरों पर प्रबंधित करने में मदद करती थी। इस विंडो के बंद होने से पहले फंड जुटाकर, बैंक इन लागत लाभों को लॉक करने की कोशिश कर रहे हैं।
13 अगस्त, 2026 तक, भारतीय बैंकों द्वारा इस स्वैप स्कीम के तहत जुटाई गई कुल राशि 56.85 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र में उच्च उपयोग को दर्शाता है। डेडलाइन नज़दीक आने के साथ, अन्य बैंक भी इस फैसिलिटी के लाभों को अधिकतम करने के लिए अपने विदेशी उधार योजनाओं में तेजी ला रहे हैं।
शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया और LIC की मंज़ूरी
HDFC Bank के शेयर में 20 अगस्त, 2026 को लगभग 1% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹727.80 पर बंद हुआ। इस उछाल को लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) को बैंक में अपनी हिस्सेदारी 9.99% तक बढ़ाने की RBI की मंज़ूरी से मिली सकारात्मक खबरों से भी बल मिला। इस रेगुलेटरी मंजूरी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, साथ ही नए कर्ज जुटाने की खबर ने भी योगदान दिया।
यह इस साल अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में HDFC Bank का पहला कदम नहीं है। बैंक ने जून 2026 में पांच साल के डॉलर बॉन्ड के ज़रिए 750 मिलियन डॉलर जुटाए थे। नई कर्ज योजना, फंड जुटाने के स्रोतों में विविधता लाने और विदेशी लिक्विडिटी का लाभ उठाने की उसकी रणनीति का हिस्सा है।
आगे, निवेशक 31 अगस्त को RBI स्वैप फैसिलिटी के बंद होने पर नज़र रखेंगे। यह रियायती विंडो बंद होने के बाद, बैंकों के मानक बाज़ार-आधारित हेजिंग तरीकों पर वापस लौटने की संभावना है, जिससे फॉरेन करेंसी देनदारियों की फंडिंग लागत में बदलाव आ सकता है। बॉन्ड इश्यू की अंतिम मूल्य-निर्धारण, जो जल्द ही अपेक्षित है, मौजूदा वैश्विक ब्याज दर माहौल में भारतीय बैंक ऋण के प्रति निवेशकों की भूख का एक प्रमुख संकेचक होगा।
