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HDFC Bank Share: बड़े फैसले की तैयारी! गवर्नेंस पर उठ रहे सवालों के बीच बैंक जुटाएगा बड़ी रकम, शेयर की गिरी चाल

BANKINGFINANCE
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AuthorMehul Desai|Published at:
HDFC Bank Share: बड़े फैसले की तैयारी! गवर्नेंस पर उठ रहे सवालों के बीच बैंक जुटाएगा बड़ी रकम, शेयर की गिरी चाल
Overview

HDFC Bank के बोर्ड की **18 अप्रैल** को एक अहम बैठक होनी है, जिसमें फंड जुटाने के लिए कर्ज (Debt) के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे और कंपनी के शेयर में लगातार आ रही गिरावट के चलते गवर्नेंस (Governance) को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

गवर्नेंस पर उठे सवालों के बीच बैंक जुटाएगा बड़ा फंड

पूर्व चेयरमैन Atanu Chakraborty के नैतिक चिंताओं के चलते अचानक इस्तीफे के बाद HDFC Bank इन दिनों गवर्नेंस को लेकर गहन जांच के दायरे में है। इस माहौल के बीच, बैंक के बोर्ड ने 18 अप्रैल को एक बैठक बुलाई है। इसमें फंड जुटाने के लिए विभिन्न कर्ज साधनों (Debt Instruments) जैसे परपेचुअल डेट (Perpetual Debt), टियर II कैपिटल बॉन्ड (Tier II Capital Bonds) और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग के लिए लॉन्ग-टर्म बॉन्ड (Long-term Bonds) पर विचार किया जाएगा। अगले साल तक प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए यह फंड जुटाया जा सकता है।

शेयर में गिरावट और निवेशकों की चिंता

बैंक का शेयर फिलहाल अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। 2 अप्रैल, 2026 तक यह ₹726-₹740 के दायरे में था। इस साल शेयर में करीब 33% की गिरावट आई है, जो बाजार और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले काफी कमजोर प्रदर्शन है। यह गिरावट शेयरधारकों के बीच बेचैनी का माहौल पैदा कर रही है।

पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे से बढ़ा विवाद

पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन Atanu Chakraborty ने 18 मार्च, 2026 को अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पिछले दो वर्षों में देखे गए 'घटनाक्रमों और तौर-तरीकों' पर व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के साथ टकराव का हवाला दिया था। खबरों के मुताबिक, उनकी चिंताएं AT-1 बॉन्ड की गलत बिक्री (Mis-selling) और बैंक की दुबई ब्रांच में परिचालन संबंधी आचरण से जुड़ी थीं। ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA) ने वित्त मंत्री से HDFC Bank के मामलों की जांच की मांग की है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि HDFC Bank अच्छी तरह से पूंजीकृत (Well-capitalized) और वित्तीय रूप से मजबूत है। रिपोर्टों से यह भी संकेत मिलता है कि रणनीतिक मतभेदों के कारण Chakraborty और सीईओ Sashidhar Jagdishan के बीच सत्ता संघर्ष की संभावना हो सकती है। बैंक कथित तौर पर Chakraborty के इस्तीफे पत्र की समीक्षा के लिए बाहरी लॉ फर्मों का उपयोग कर रहा है।

मार्केट में तुलना और विश्लेषकों की राय

लगभग ₹11.4 ट्रिलियन मार्केट कैप वाली HDFC Bank fast-moving बैंकिंग सेक्टर में काम करती है। इसका P/E रेश्यो लगभग 15.3-15.6x है, जो State Bank of India (SBI) (10.4-11.4x P/E, ₹9.0 ट्रिलियन मार्केट कैप) से अधिक है। ICICI Bank का P/E रेश्यो 15.2-16.4x और मार्केट कैप ₹8.7 ट्रिलियन के साथ लगभग समान है। विश्लेषकों की राय बंटी हुई है; कुछ गवर्नेंस चिंताओं और संभावित चुनौतियों के कारण 'Reduce' रेटिंग की सलाह दे रहे हैं, जबकि अन्य मजबूत कमाई की संभावनाओं पर जोर दे रहे हैं। JPMorgan ने 29 मार्च, 2026 को आकर्षक मूल्यांकन का हवाला देते हुए स्टॉक को 'Overweight' पर अपग्रेड किया, लेकिन टारगेट प्राइस (Price Target) में कटौती भी की।

निवेशकों का भरोसा दांव पर

कर्ज जुटाने की योजना और गवर्नेंस के मुद्दे मिलकर निवेशकों के भरोसे के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करते हैं। Chakraborty के इस्तीफे के बाद शेयर में तेज गिरावट आई, जिससे बाजार मूल्य में लगभग ₹1 लाख करोड़ का नुकसान हुआ, जो निवेशकों की बेचैनी को दर्शाता है। इससे बैंक के लिए उधारी लागत बढ़ सकती है या भविष्य में फंड जुटाने में चुनौतियां आ सकती हैं। AT-1 बॉन्ड की गलत बिक्री के आरोप और दुबई ब्रांच की समस्याएं आंतरिक नियंत्रण (Internal Controls) और नैतिक निगरानी (Ethical Oversight) पर सवाल उठाती हैं।

मजबूत नतीजों की उम्मीद

इन सब चिंताओं के बावजूद, HDFC Bank से 31 मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए मजबूत वित्तीय नतीजे पेश करने की उम्मीद है। विश्लेषकों का अनुमान है कि नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) लगभग ₹19,200 करोड़ होगा, जो पिछले साल की तुलना में 9% की वृद्धि है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) 3.3% से 3.5% पर स्थिर रहने का अनुमान है। बैंक को FY26-28 से 12-13% वार्षिक लोन ग्रोथ की उम्मीद है, जो सिस्टम ग्रोथ के बराबर है, और डिपॉजिट में लगभग 14% सालाना वृद्धि होने का अनुमान है। 18 अप्रैल की बोर्ड बैठक में डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश पर भी विचार किया जाएगा।

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