Atanu Chakraborty, जो HDFC Bank के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर थे, ने 18 मार्च, 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण बताते हुए कहा कि बैंक के अंदर 'कुछ ऐसी चीजें और तरीके' (happenings and practices) चल रहे थे जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता (ethics) के अनुरूप नहीं थे।
उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनुभवी प्रोफेशनल Keki Mistry को अगले तीन महीनों के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। श्री Mistry का यह कार्यभार 19 मार्च, 2026 से शुरू होगा।
किसी भी बैंक के लिए, खासकर देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC Bank के मामले में, पार्ट-टाइम चेयरमैन का इस तरह नैतिक आधार पर इस्तीफा देना गंभीर गवर्नेंस (governance) और आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यह ऐसे समय में हुआ है जब पूरा बैंकिंग सेक्टर बोर्ड की निगरानी और नैतिक आचरण को लेकर बढ़ते रेगुलेटरी (regulatory) जांच के दायरे में है।
Atanu Chakraborty, जो पूर्व IAS अधिकारी और आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) के पूर्व सचिव भी रह चुके हैं, मई 2021 में HDFC Bank के बोर्ड से जुड़े थे। उन्हें 5 मई, 2024 से 4 मई, 2027 तक के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका यह इस्तीफा उस अवधि से काफी पहले हुआ है। वहीं, नए अंतरिम चेयरमैन Keki Mistry एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और HDFC Ltd. के विलय से पहले वे वहाँ वाइस चेयरमैन और CEO रह चुके हैं। वे HDFC Bank बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बने रहेंगे।
गौरतलब है कि HDFC Bank हाल के दिनों में रेगुलेटरी जांच के घेरे में रहा है। नवंबर 2025 में RBI ने बैंक पर कंप्लायंस (compliance) में खामियों के लिए ₹91 लाख का जुर्माना लगाया था। इसके अलावा, SEBI ने दिसंबर 2024 में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (investment banking) के मुद्दों और देरी से हुई खुलासों पर बैंक को चेतावनी पत्र जारी किए थे। RBI ने बैंक के IT सिस्टम में आई दिक्कतों के चलते क्रेडिट कार्ड सेवाओं पर अस्थायी रोक भी लगाई थी।
Mr. Chakraborty के इस्तीफे से बैंक की शीर्ष नेतृत्व संरचना (leadership structure) में बदलाव आया है। Keki Mistry अंतरिम चेयरमैन के तौर पर निरंतरता सुनिश्चित करेंगे। अब बैंक की आंतरिक कार्यप्रणाली और गवर्नेंस मानकों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं, Mr. Chakraborty द्वारा बताए गए विशिष्ट 'तरीके और व्यवहार' (happenings and practices) आंतरिक गवर्नेंस या नैतिक मुद्दों की ओर इशारा कर सकते हैं, जिन्हें सुलझाने की आवश्यकता होगी। निवेशक समुदाय का विश्वास तब तक परीक्षण के दायरे में रह सकता है जब तक कि इस्तीफे के कारणों का संतोषजनक समाधान न हो जाए।
आगे चलकर, HDFC Bank के इस्तीफे के कारणों पर अधिक स्पष्टीकरण, स्थायी पार्ट-टाइम चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया और समय-सीमा, तथा इस पूरे घटनाक्रम पर बाजार और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
