HDFC Bank के CEO शशिधर जगदीशन ने संकेत दिए हैं कि बैंक अपने मुनाफे को सुरक्षित रखने के लिए होम लोन पोर्टफोलियो का हिस्सा बेच या सिकीरिटाइज (Securitize) कर सकता है। बैंक अब आक्रामक वॉल्यूम ग्रोथ के बजाय मार्जिन पर फोकस कर रहा है।
मार्जिन पर बैंक का फोकस
HDFC Bank अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। बैंक अपने होम लोन पोर्टफोलियो के कुछ हिस्सों को बेचने या सिकीरिटाइज करने पर विचार कर रहा है। सिकीरिटाइजेशन के जरिए बैंक लोन पूल को बंडल करके निवेशकों को बेच देता है, जिससे उसे पूंजी खाली करने और जोखिम कम करने में मदद मिलती है। यह फैसला बैंक की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मुनाफे को प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
होम लोन सेक्टर में ब्याज दरों को लेकर इन दिनों जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है। HDFC Bank ने स्पष्ट किया है कि वे ऐसे सौदों से दूर रहने में ही समझदारी समझते हैं जो उनके आंतरिक मुनाफे के टारगेट को पूरा नहीं करते। CEO शशिधर जगदीशन का कहना है कि वे ग्रोथ के आंकड़ों के पीछे भागने के बजाय बैंक की वित्तीय सेहत को प्राथमिकता देंगे।
निवेशकों को किन आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए?
जुलाई 2023 में HDFC Limited के साथ मर्जर के बाद, बैंक का कामकाज बदल गया है। मैनेजमेंट ने निवेशकों से अपील की है कि वे अब बैंक के प्रदर्शन को आंकने के लिए पुराने तरीकों के बजाय Return on Assets (RoA) और Earnings Per Share (EPS) जैसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स पर ध्यान दें।
डिपॉजिट कस्टमर बनाना है असली लक्ष्य
बैंक की रणनीति का एक मुख्य हिस्सा होम लोन ग्राहकों को बैंकिंग ग्राहकों (डिपॉजिट अकाउंट) में बदलना है। अच्छी खबर यह है कि कुल होम लोन पोर्टफोलियो का लगभग 60% पहले से ही HDFC Bank के खातों के जरिए सर्व किया जा रहा है। डिपॉजिट ग्राहकों की संख्या बढ़ने से बैंक की फंड लागत (Cost of Funds) कम होगी, जो भविष्य में मुनाफे को बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।
