HDFC Bank के MD और CEO शशिधर जगदीशन 26 अक्टूबर, 2026 को अपना पद छोड़ देंगे। बैंक इस समय गवर्नेंस और मर्जर के बाद के वित्तीय दबावों से जूझ रहा है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
HDFC Bank में बड़े बदलाव की तैयारी हो चुकी है। बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन 26 अक्टूबर, 2026 को अपना कार्यभार संभालना बंद कर देंगे। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब देश का यह सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक अपने मर्जर के बाद के बिजनेस मॉडल को स्थिर करने की चुनौती से जूझ रहा है।
वित्तीय दबाव और चुनौतियां
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे बैंक के सामने मौजूद परिचालन चुनौतियों को दर्शाते हैं। हालांकि बैंक ने साल-दर-साल आधार पर 5% की बढ़त के साथ लगभग ₹19,060 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन मुख्य दक्षता मानकों (efficiency metrics) पर दबाव बना हुआ है। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.26% पर आ गया है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बैंक का लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो है, जो 95.8% के ऊंचे स्तर पर है। इसका मतलब है कि बैंक तेजी से लोन तो दे रहा है, लेकिन उस अनुपात में नए डिपॉजिट नहीं जुटा पा रहा, जिससे उसे महंगी फंडिंग लेनी पड़ रही है। इसके अलावा, CASA रेशियो भी गिरकर 32% पर आ गया है, जो मर्जर से पहले 48% हुआ करता था।
गवर्नेंस पर सवाल और बोर्ड की भूमिका
बैलेंस शीट के अलावा, HDFC Bank अपनी इंटरनल गवर्नेंस को लेकर भी सवालों के घेरे में है। मार्च 2026 में पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बोर्ड की स्थिरता और निगरानी पर प्रश्न उठे थे। डिपॉजिट जुटाने की प्रक्रिया में व्यावसायिक ओवररीच (business overreach) की पेनल्टी की खबरों ने भी निवेशकों के भरोसे को कम किया है। अब यह नेतृत्व परिवर्तन बैंक के लिए बोर्ड पर भरोसा बहाल करने का एक बड़ा मौका माना जा रहा है।
बाजार का मूड और निवेशकों की नजर
साल 2026 में बैंक के शेयर में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। स्टॉक साल की शुरुआत से अब तक लगभग 28% गिर चुका है और अपने 52-वीक लो के करीब ट्रेड कर रहा है। निवेशकों की अब मुख्य नजर इस बात पर है कि बैंक का उत्तराधिकारी कौन होगा—क्या बैंक स्थिरता के लिए किसी इंटरनल लीडर को चुनेगा या बाहरी रणनीतिकार को मौका देगा।
