HDFC Bank ने अपने लोन की ब्याज दरों में **5 bps** की कटौती की है, जबकि Bank of Baroda ने 3 महीने की दर में **10 bps** की बढ़ोतरी की है। RBI की ओर से रेपो रेट **5.25%** पर स्थिर रहने के बीच, दोनों बैंकों की ये अलग-अलग रणनीतियां उनके फंडिग और ग्रोथ प्लान को दर्शाती हैं।
HDFC Bank ने घटाईं दरें, जानें नया रेट
HDFC Bank ने 7 अगस्त, 2026 से लागू होने वाली ब्याज दरों में 5 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती का ऐलान किया है। इस कटौती के बाद, बैंक की ज्यादातर अवधियों के लिए MCLR दरें अब 8.00% से लेकर 8.65% के बीच रहेंगी। वहीं, बैंक ने अपनी 2-साल की MCLR को 8.55% पर स्थिर रखा है। इस कदम से बैंक अपने लोन को नए ग्राहकों के लिए और ज्यादा आकर्षक बनाने या कुछ खास सेगमेंट्स में लोन ग्रोथ को बढ़ावा देने की कोशिश कर सकता है।
Bank of Baroda का अलग रास्ता
दूसरी ओर, Bank of Baroda ने 12 अगस्त, 2026 से प्रभावी, अपनी 3 महीने की MCLR में 10 bps का इजाफा करने का फैसला किया है। इसके बाद, 3 महीने की MCLR अब 8.30% हो गई है। यह कदम संभवतः शॉर्ट-टर्म लोन पर मार्जिन सुधारने या अपनी लिक्विडिटी को मैनेज करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
लोन लेने वालों और निवेशकों के लिए मतलब
यह समझना ज़रूरी है कि ये बदलाव सभी तरह के लोन्स पर एक जैसा असर नहीं डालेंगे। MCLR एक बेंचमार्क है जिसका इस्तेमाल बैंक लोन की कीमतें तय करने के लिए करते हैं। हालांकि, आजकल कई नए लोन्स, खासकर रिटेल और पर्सनल लोन, सीधे RBI के रेपो रेट (जो फिलहाल 5.25% है) से जुड़े एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) से लिंक होते हैं। जिन ग्राहकों के पुराने लोन या कॉन्ट्रैक्ट MCLR से जुड़े हैं, उनकी ब्याज दरें केवल कॉन्ट्रैक्ट की रीसेट डेट पर ही बदलेंगी।
निवेशकों के लिए, यह दरें बैंकों की मौजूदा प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी देती हैं। दरें घटाने वाला बैंक मार्केट शेयर बढ़ाना चाहता है, जिससे अगर डिपॉजिट की लागत ज़्यादा रही तो मुनाफे पर दबाव आ सकता है। वहीं, दरें बढ़ाने वाला बैंक अपने इंटरेस्ट मार्जिन को सुरक्षित रखना चाहता है।
