एक तरफ जहां HDFC Bank के लोन देने के कारोबार में अच्छी रिकवरी दिख रही है, वहीं शेयर बाजार में निवेशक कुछ और ही कारणों से चिंतित नजर आ रहे हैं।
बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तिमाही के अंत तक HDFC Bank के कुल एडवांसेज (Advances) यानी दिए गए लोन 10.2% बढ़कर ₹30.57 लाख करोड़ हो गए। यह लगातार दूसरा क्वार्टर है जब लोन ग्रोथ डबल-डिजिट में रही है, जो HDFC Ltd. के साथ मर्जर के बाद स्थिरीकरण का संकेत देता है। डिपॉजिट्स (Deposits) में भी 14.4% का इजाफा हुआ, जो ₹31.05 लाख करोड़ तक पहुंच गए। डिपॉजिट ग्रोथ के कारण बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो (Credit-to-Deposit Ratio) सुधरकर लगभग 98.5% हो गया, हालांकि यह अभी भी इंडस्ट्री के औसत से थोड़ा ऊपर है।
इसके बावजूद, बैंक का शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹726.65 (2 अप्रैल 2026 तक) के करीब बना हुआ है। बाजार विश्लेषक मानते हैं कि बैंक का स्टॉक फिलहाल अपने प्रतिस्पर्धियों और ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। HDFC Bank का प्राइस-टू-स्टैंडअलोन बुक वैल्यू (Price-to-Standalone Book Value) करीब 2.1 गुना है, जबकि Kotak Mahindra Bank का यह 2.8 गुना है। पिछले पांच सालों में HDFC Bank का यह आंकड़ा 2.1 से 4.8 गुना के बीच रहा है। TTM (Trailing Twelve Month) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 15.5x से 17.7x के बीच है, जो Kotak Mahindra Bank (लगभग 19-24.5x) से कम, Axis Bank (लगभग 12-14.3x) के बराबर और SBI (लगभग 11-12x) से थोड़ा ज्यादा है।
इन सबके पीछे मुख्य वजहें बैंक के गवर्नेंस (Governance) को लेकर चल रही चिंताएं और मर्जर के बाद इंटीग्रेशन की चुनौतियां हैं। 18 मार्च, 2026 को बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty ने 'बैंक के भीतर कुछ घटनाओं और तौर-तरीकों' का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था, जिससे गवर्नेंस पर सवाल उठे हैं। इसके अलावा, क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो का 98.5% पर बना रहना (जो SBI के लगभग 76.6% मार्च 2024 में के मुकाबले काफी ज्यादा है) भी चिंता का विषय है, भले ही यह मर्जर के बाद के 104.4% के स्तर से नीचे आया है।
बावजूद इसके, कई ब्रोकरेज फर्म्स HDFC Bank के लॉन्ग-टर्म आउटलुक को लेकर पॉजिटिव हैं। JPMorgan ने हाल ही में आकर्षक वैल्यूएशन का हवाला देते हुए स्टॉक को 'Overweight' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹1,010 से ₹1,240 तक का रखा है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि FY26-FY28 के बीच लोन ग्रोथ 13% CAGR की दर से बढ़ सकती है। 18 अप्रैल, 2026 को आने वाले बैंक के ऑडिटेड Q4FY26 नतीजे निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।