HDFC Bank की तूफानी तेजी! Nifty 10 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर

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AuthorNeha Patil|Published at:
HDFC Bank की तूफानी तेजी! Nifty 10 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर

सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में शानदार तेजी देखने को मिली। Nifty और Sensex दोनों ही 10 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए। इस तेजी का मुख्य कारण HDFC Bank के शेयरों में आई **3.6%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी रही, जो कंपनी के जून तिमाही के मजबूत बिज़नेस नंबर्स के बाद आई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की वापसी के संकेत ने भी बाज़ार को सहारा दिया।

बाज़ार में आई रौनक

नए हफ़्ते की शुरुआत के साथ भारतीय शेयर बाज़ारों में उत्साह का माहौल रहा। सोमवार को Nifty 50 और Sensex, दोनों में 0.7% का उछाल देखा गया और ये दोनों ही पिछले दस हफ़्तों के अपने सबसे ऊँचे स्तर पर बंद हुए। Nifty ने 24,430 का आंकड़ा छुआ, जबकि Sensex 78,285 पर बंद हुआ। यह उछाल पिछले चार कारोबारी सत्रों से जारी तेज़ी का ही हिस्सा है, जहाँ बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग 2.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि बिकवाली के दौर के बाद निवेशकों का भरोसा वापस लौट रहा है।

HDFC Bank बनाThe Market Mover?

इस बाज़ार तेज़ी की एक बड़ी वजह HDFC Bank रहा, जिसने जून में समाप्त तिमाही के लिए अपने ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) में 15.4% की बढ़ोतरी दर्ज की है। निवेशकों ने इन आंकड़ों का गर्मजोशी से स्वागत किया और शेयर की कीमत 3.6% उछल गई। हालाँकि, पूरे बैंकिंग सेक्टर के नतीजे मिले-जुले रहे। IndusInd Bank, Bandhan Bank और Karur Vysya Bank जैसे दूसरे बैंकों के शेयरों में भी 3.4% से 4.2% तक की तेज़ी देखी गई। लेकिन, Kotak Mahindra Bank के शेयर में 3.9% की गिरावट ने ब्रॉडर बैंकिंग इंडेक्स पर थोड़ा दबाव बनाया, क्योंकि इस बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से धीमी ग्रोथ दर्ज की थी। वहीं, सरकारी बैंकों पर दबाव बना रहा और वे लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ 0.9% नीचे बंद हुए।

बाज़ार को मिले अन्यThe Boosters

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी बाज़ार के सेंटिमेंट (Sentiment) को और बेहतर बनाया है। तेल की कीमतें फरवरी के स्तर तक गिर गई हैं। ऊर्जा की कम लागत को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे महंगाई कम हो सकती है और कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिल सकता है। इसके अलावा, बारिश की कमी के कम होने की खबरें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं कम कर रही हैं। साथ ही, शुरुआती संकेत बताते हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लंबे समय तक बाज़ार से बाहर रहने के बाद अब भारतीय इक्विटी (Equity) में फिर से रुचि दिखा रहे हैं।

आगे क्या?

निवेशक अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि तिमाही नतीजों के ये अपडेट्स असल बॉटम-लाइन प्रॉफिट (Bottom-line Profit) में कैसे तब्दील होते हैं, जब बैंक अपनी पूरी फाइनेंशियल रिपोर्ट जारी करेंगे। तेल की कीमतों में हालिया गिरावट का महंगाई पर असर और उसके बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पॉलिसी को लेकर उम्मीदें भी अहम बनी रहेंगी। खास तौर पर बैंकिंग सेक्टर के लिए, बाज़ार यह देखेगा कि क्या निजी बैंकों की ग्रोथ पब्लिक सेक्टर बैंकों के मौजूदा दबाव के सामने अपनी गति बनाए रख पाती है।

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