HDFC Bank पर न्यूयॉर्क की कोर्ट में एक क्लास-एक्शन लॉ-सूट (Class-action lawsuit) दायर किया गया है। बैंक पर जुलाई 2023 से मई 2026 के बीच सिक्योरिटीज फ्रॉड का आरोप लगा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
आरोपों की सच्चाई क्या है?
यह मामला न्यूयॉर्क की अदालत में तब सामने आया जब बैंक पर महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) के साथ कुछ वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगा। शिकायत के अनुसार, बैंक ने कथित तौर पर ₹45 करोड़ की राशि MSRDC को दी थी, जिसे मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया। आरोप है कि यह पैसा असल में 6.01% का ब्याज पाने के लिए एक अवैध तरीका था, जो सामान्य रिटेल डिपॉजिट रेट से 2.51% ज्यादा है।
बैंक ने क्या कहा?
HDFC Bank ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक मैनेजमेंट का कहना है कि यह एक 'मेरिटलेस' (बेबुनियाद) केस है और इसे सिर्फ बाजार की अस्थिरता का फायदा उठाने के लिए की गई 'अपॉर्चुनिस्टिक लिटिगेशन' बताया है। बैंक अपनी कानूनी टीम के साथ इन आरोपों का मजबूती से बचाव करने के लिए तैयार है।
बाजार और निवेशकों पर असर
इस खबर के बाद से भारतीय शेयर बाजार में HDFC Bank के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। 27 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, बैंक का शेयर करीब 1.18% नीचे कारोबार कर रहा था।
निवेशकों को डर इस बात का है कि भले ही ₹45 करोड़ की रकम बैंक के बड़े बैलेंस शीट के सामने छोटी हो, लेकिन इससे भविष्य में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से रेगुलेटरी जांच का दायरा बढ़ सकता है। गवर्नेंस और मैनेजमेंट की पारदर्शिता को लेकर संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) अब बारीकी से इस केस पर नजर बनाए हुए हैं।
लीड वादी (Lead Plaintiff) बनने की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर 2026 है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को अभी घबराने के बजाय कोर्ट के अगले अपडेट्स और बैंक की तरफ से आने वाली आधिकारिक डिस्क्लोजर का इंतजार करना चाहिए।
