HDFC Bank पर NRI निवेशकों का बड़ा कानूनी शिकंजा, $10 करोड़ के फंड फंसने का मामला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
HDFC Bank पर NRI निवेशकों का बड़ा कानूनी शिकंजा, $10 करोड़ के फंड फंसने का मामला

HDFC Bank की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लक्जमबर्ग के एक लाइफ सेटलमेंट फंड में **$10 करोड़** (करीब **$100 million**) की राशि साल **2020** से अटकी हुई है, जिसके लिए **75** से ज्यादा NRI निवेशकों ने बैंक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला 2017 से 2019 के बीच बेचे गए एक कॉम्प्लेक्स फाइनेंशियल प्रोडक्ट का है। निवेशकों का आरोप है कि बैंक ने दुबई ऑपरेशंस के जरिए लक्जमबर्ग बेस्ड 'कार्लाइल मैनेजमेंट कंपनी' के लाइफ सेटलमेंट फंड को 'लो-रिस्क, हाई-यील्ड' स्कीम के तौर पर पेश किया था। दावा है कि बैंक ने 14% से 16% तक रिटर्न का वादा किया था, लेकिन 2020 के बाद से ही फंड में रिडेम्पशन (Redemption) पूरी तरह फ्रीज हो गया है।

निवेशकों की मांग और बैंक का रुख

फिलहाल इस कानूनी लड़ाई में शामिल निवेशकों का $1.35 करोड़ ($13.5 million) का प्रिंसिपल अमाउंट दांव पर लगा है। इन निवेशकों ने बैंक को 31 अगस्त, 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो वे मामला सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक ले जाएंगे।

दूसरी ओर, HDFC Bank ने अपने बचाव में कहा है कि वह केवल एक 'फैसिलिटेटर' (Facilitator) की भूमिका में था और थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट के परफॉर्मेंस या लिक्विडिटी के लिए जिम्मेदार नहीं है।

रिस्क फैक्टर

यह विवाद बैंक के लिए चिंता का विषय है क्योंकि 2026 में अब तक बैंक का शेयर 27% तक गिर चुका है। ऐसे में मिस-सेलिंग (Mis-selling) के ये आरोप बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस और क्लाइंट रिलेशनशिप पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। मार्केट एनालिस्ट इस घटना को कॉम्प्लेक्स ऑफशोर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक मान रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.