Atanu Chakraborty का यह अचानक इस्तीफा HDFC Bank की मजबूत प्रतिष्ठा के लिए बड़ा झटका है। यह बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर आया है, जब वह HDFC Ltd. के साथ हुए मर्जर (Merger) को सफलतापूर्वक पूरा करने और उसके लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं ने मर्जर इंटीग्रेशन की राह को और कठिन बना दिया है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई है, जब व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) की शिकायतें बढ़ी हैं और रेगुलेटर्स (Regulators) भी फाइनेंशियल सेक्टर में सुशासन पर जोर दे रहे हैं।
18 मार्च 2026 को चेयरमैन के इस्तीफे की खबर के बाद HDFC Bank के शेयरों में भारी गिरावट आई। बुधवार, 19 मार्च 2026 को शेयर 5% से ज्यादा टूट गए और पिछले 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए। Chakraborty ने अपने इस्तीफे में कहा कि पिछले दो सालों में उन्होंने बैंक में कुछ ऐसी चीजें और तौर-तरीके देखे हैं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे। हालांकि, बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आश्वासन दिया है कि बैंक के आचरण या गवर्नेंस को लेकर कोई 'बड़ी चिंता' नहीं है। निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए, बैंक ने इस्तीफे की जांच के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय लॉ फर्मों (Law Firms) को नियुक्त किया है। Keki Mistry को तीन महीने के लिए अंतरिम नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है।
HDFC Bank हमेशा से मजबूत गवर्नेंस और बेहतरीन कामकाज के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब इस पर उठते सवालों से बैंक के प्रीमियम वैल्यूएशन (Premium Valuation) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल बैंक का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 14.78x से 15.35x के बीच है। यह ICICI Bank और Federal Bank जैसे प्रतिस्पर्धियों के समान या थोड़ा कम मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, लेकिन State Bank of India और Axis Bank से ऊपर है। बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) करीब ₹11.45 लाख करोड़ है। HDFC Bank का प्रीमियम हमेशा से इसके सख्त गवर्नेंस के लिए रहा है। अब इस स्थिति से एक 'गवर्नेंस डिस्काउंट' (Governance Discount) का खतरा है, जो निवेश आकर्षित करने की बैंक की क्षमता और मर्जर के बाद पहले से ही टाइट हो चुके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin - NIMs) को प्रभावित कर सकता है।
बैंक की गवर्नेंस से जुड़ी समस्याएं व्हिसलब्लोअर की कई शिकायतों से और बढ़ गई हैं। फाइनेंशियल ईयर 2020 से 2025 के बीच 747 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें चोरी, जालसाजी से लेकर खराब बिजनेस प्रैक्टिसेज तक के मुद्दे उठाए गए। हालिया रिपोर्ट्स में क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) के AT1 बॉन्ड की कथित मिस-सेलिंग (Mis-selling) को लेकर एक आंतरिक जांच का भी खुलासा हुआ है, जिसके चलते तीन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स (Executives) को नौकरी से निकाला गया है। बोर्ड के फैसलों, जैसे CEO की नियुक्ति और नए बोर्ड सदस्यों के चयन को लेकर भी मतभेद की खबरें हैं।
आगे चलकर HDFC Bank के लिए निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतना एक बड़ी चुनौती होगी। Jefferies और Motilal Oswal जैसे कई ब्रोकरेज (Brokerages) 'बाय' (Buy) रेटिंग के साथ 55% और 38% तक के अपसाइड का लक्ष्य दे रहे हैं, जो बैंक के मजबूत फंडामेंटल्स (Fundamentals) और रेगुलेटर के आश्वासनों का हवाला देते हैं। हालांकि, Kotak Securities जैसे कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) 'अस्पष्ट निकास कारणों' के चलते वैल्यूएशन में गिरावट की चेतावनी दे रहे हैं। Macquarie ने HDFC Bank को अपनी टॉप बाय लिस्ट से हटा दिया है, लेकिन 'आउटपरफॉर्म' (Outperform) रेटिंग बरकरार रखी है। इस पूरे मामले में बोर्ड रिव्यू की पारदर्शिता और स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति पर एक स्पष्ट योजना निवेशकों का भरोसा बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
