HDFC Bank एक बार फिर मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है। करीब 70 NRI निवेशकों ने बैंक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि HDFC Bank ने उन्हें Carlisle Asset Management का एक ऐसा फंड बेचा जो 2020 से बंद पड़ा है और निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है।
लाखों डॉलर फंसे, निवेशकों ने HDFC Bank पर उठाए सवाल
HDFC Bank के लिए मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं। करीब 70 नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) निवेशकों ने बैंक पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि HDFC Bank ने 2017 से 2019 के बीच उन्हें Carlisle Asset Management का एक ऐसा फंड बेच दिया, जिसमें सालाना 14% से 16% तक रिटर्न का वादा किया गया था। लेकिन, 2020 के आखिर में इस फंड ने निवेशकों के पैसे देने पर रोक लगा दी, जिससे करीब $100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) की रकम फंस गई है।
मिस-सेलिंग का आरोप या सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका?
निवेशकों का आरोप है कि यह प्रोडक्ट उन्हें कम जोखिम वाला और बढ़िया रिटर्न देने वाला बताकर बेचा गया था। लेकिन अब जब उनका पैसा फंस गया है, तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, HDFC Bank अपनी सफाई में कह रहा है कि उसने सिर्फ एक डिस्ट्रीब्यूटर यानी मध्यस्थ के तौर पर काम किया था, न कि फंड मैनेजर के तौर पर। बैंक का कहना है कि फंड की परफॉरमेंस, लिक्विडिटी और पैसे वापस करने की जिम्मेदारी फंड हाउस, यानी Carlisle Asset Management की है। बैंक ने यह भी कहा कि बिक्री के समय फंड सभी नियमों का पालन कर रहा था।
वेस्ट एशिया में पिछली कार्रवाई का साया
यह मामला इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि HDFC Bank पहले भी वेस्ट एशिया क्षेत्र में अपनी कार्यप्रणाली को लेकर जांच के दायरे में रहा है। सितंबर 2025 में, दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने बैंक की दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) ब्रांच पर नए ग्राहक बनाने पर रोक लगा दी थी। उस समय भी बैंक के बिजनेस प्रैक्टिस पर सवाल उठाए गए थे। इस घटना के बाद बैंक ने अपने कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की थी।
फंड हाउस पर भी जांच की आंच
मामले में एक और पेचीदगी तब जुड़ गई जब Morpheus Research ने Carlisle के मैनेजमेंट की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए थे। हालांकि, Abacus Global Management, जिसने हाल ही में Carlisle को खरीदा है, ने इन आरोपों को गलत बताया है।
यह देखना अहम होगा कि HDFC Bank इन शिकायतों से कैसे निपटता है और क्या इसका बैंक के कानूनी या रेगुलेटरी स्थिति पर कोई असर पड़ता है। NRI ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि यह क्षेत्र बैंक के लिए डिपॉजिट और बिजनेस का एक अहम स्रोत रहा है।
