HDFC Bank के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (Deputy MD) काइज़द मानेक भरूचा, FY26 में बैंक के सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले एग्जीक्यूटिव बनकर उभरे हैं। उन्होंने **₹17.14 करोड़** की शानदार कमाई की है, जो CEO शशिधर जगदीशन की **₹15.13 करोड़** की कमाई से भी ज़्यादा है। यह वेतन ढांचा सीनियर लीडरशिप के लिए परफॉरमेंस-लिंक्ड बोनस और स्टॉक ऑप्शन्स पर बैंक के फोकस को दर्शाता है।
जानिए भरूचा की कमाई का राज
HDFC Bank की मार्च 2026 में समाप्त हुई फाइनेंशियल ईयर की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के टॉप लीडरशिप की सैलरी प्रदर्शन-आधारित इंसेंटिव्स (performance-based incentives) से काफी जुड़ी हुई है। डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर काइज़द मानेक भरूचा ने इस साल कुल ₹17.14 करोड़ का रेमुनरेशन (remuneration) प्राप्त किया। यह आंकड़ा मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन की इसी अवधि में हुई ₹15.13 करोड़ की कमाई से ज़्यादा है।
इंसेंटिव्स में हुई बढ़ोतरी
भरूचा की ज़्यादा कमाई का मुख्य कारण वेरिएबल कंपोनेंट्स (variable components) में हुई बड़ी बढ़ोतरी है। उनके कंपनसेशन पैकेज में ₹3.59 करोड़ की बेसिक सैलरी और ₹8.59 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस शामिल था। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन्स (ESOPs) का रहा, जिसमें उन्हें 6.23 लाख ESOPs मिले। यह पिछले साल की तुलना में लगभग पांच गुना ज़्यादा है। ESOPs एक लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव की तरह काम करते हैं, जो एग्जीक्यूटिव के हितों को शेयरहोल्डर वैल्यू से जोड़ते हैं।
CEO शशिधर जगदीशन की कुल कमाई में भी 19% की बढ़ोतरी देखी गई। उनके पैकेज में ₹3.09 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹3.46 करोड़ के अलाउंस और पर्क्स (allowances and perquisites), और ₹7.28 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस शामिल था। CEO को दिए गए स्टॉक ऑप्शन्स की संख्या पिछले फाइनेंशियल ईयर के 2.12 लाख शेयरों की तुलना में दोगुना से ज़्यादा, यानी 4.28 लाख शेयर हो गई। जगदीशन के परफॉरमेंस बोनस में 35% की बढ़ोतरी बैंक के ऑपरेशनल टारगेट्स और फाइनेंशियल गोल्स के आंतरिक मूल्यांकन को दर्शाती है।
इंसेंटिव्स का स्ट्रैटेजिक इस्तेमाल
निवेशकों के लिए, ये आंकड़े सीनियर मैनेजमेंट को मोटिवेट करने के लिए वेरिएबल पे (variable pay) का इस्तेमाल करने की बैंक की रणनीति को स्पष्ट करते हैं। कंपनसेशन का एक बड़ा हिस्सा परफॉरमेंस बोनस और स्टॉक ऑप्शन्स की ओर शिफ्ट करके, बैंक लीडरशिप को स्पेसिफिक फाइनेंशियल मेट्रिक्स (financial metrics) और स्ट्रैटेजिक माइलस्टोन्स (strategic milestones) हासिल करने पर केंद्रित रखना चाहता है।
हालांकि बड़े फाइनेंशियल संस्थानों में टॉप टैलेंट को बनाए रखने के लिए एग्जीक्यूटिव कंपनसेशन ज़्यादा होना आम बात है, लेकिन शेयरहोल्डर अक्सर इन खर्चों को बैंक के ओवरऑल प्रॉफिट ग्रोथ, ऑपरेशनल मार्जिन और एक्सपेंस रेश्यो के साथ जोड़कर देखते हैं। स्टॉक ऑप्शन्स पर निर्भरता एक लॉन्ग-टर्म नजरिया भी लाती है, क्योंकि इन इंसेंटिव्स का मूल्य समय के साथ बैंक के स्टॉक मार्केट परफॉरमेंस पर निर्भर करता है।
