HDFC Bank ने हासिल की दमदार ग्रोथ
HDFC Bank ने मार्च 2026 के अंत तक ₹31.06 लाख करोड़ की डिपॉजिट्स हासिल कर ली हैं। यह पिछले साल की तुलना में 14.4% की मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है। इस दौरान, बैंक की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 10.2% की रफ्तार से बढ़कर ₹30.58 लाख करोड़ तक पहुंची।
बैंकिंग सेक्टर से बेहतर प्रदर्शन
यह प्रदर्शन भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मार्च 2026 के मध्य तक, पूरे सेक्टर में कुल डिपॉजिट्स में सिर्फ 10.8% की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि लोंस 13.8% की तेजी से बढ़ रहे थे। ऐसे में HDFC Bank का डिपॉजिट ग्रोथ रेट सेक्टर से काफी आगे निकलना उसकी मजबूत स्थिति को दिखाता है।
CASA डिपॉजिट्स में भी मजबूती
बैंक ने अपने करंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) डिपॉजिट्स में भी 12.3% की साल-दर-साल बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹10.61 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि ग्राहक बैंक पर भरोसा रखते हैं, खासकर ऐसे समय में जब इंडस्ट्री में उधारी की लागतें बढ़ रही हैं।
इंडस्ट्री की चुनौतियां और HDFC Bank की ताकत
कई दूसरे बैंक लोन और डिपॉजिट्स के बीच बढ़ते अंतर से जूझ रहे हैं। सिस्टम-वाइड क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 83% से ऊपर चला गया था, जिससे बैंकों को महंगी फंडिंग का सहारा लेना पड़ रहा है और उनके प्रॉफिट पर दबाव बन रहा है। इस मुश्किल माहौल में HDFC Bank की मजबूत डिपॉजिट बेस उसे एक बड़ा फायदा देता है।
अन्य बैंकों की स्थिति
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 22.8% की डिपॉजिट ग्रोथ दिखाई, लेकिन उसके सस्ते CASA डिपॉजिट्स का हिस्सा थोड़ा कम हुआ। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की डिपॉजिट ग्रोथ 9.02% रही, जो लोंस की ग्रोथ से काफी धीमी थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि HDFC Bank लिक्विडिटी मैनेजमेंट में बेहतर कर रहा है।
शेयर पर दबाव और एनालिस्ट्स की राय
हालांकि, इन सबके बावजूद, HDFC Bank के शेयर में पिछले साल 17% से ज्यादा की गिरावट आई है, और मार्च 2026 में भी इसमें बड़ी गिरावट देखी गई। यह बैंक के हालिया मर्जर इंटीग्रेशन से जुड़ी चिंताओं और व्यापक मार्केट की परेशानियों को दर्शाता है। बैंक की 10.2% AUM ग्रोथ, डिपॉजिट ग्रोथ से कम है, जो शायद लोन देने में सावधानी या लाभप्रद लोन जुटाने में मुश्किल का संकेत हो सकता है।
एनालिस्ट्स (विश्लेषक) हालांकि अभी भी उम्मीद बनाए हुए हैं, ज्यादातर 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग और ₹1,128.08 का औसत टारगेट प्राइस दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या बैंक अपनी मजबूत डिपॉजिट बेस का इस्तेमाल करके प्रॉफिट मार्जिन बढ़ा पाएगा, खासकर जब पूरी बैंकिंग सेक्टर उधारी की बढ़ी लागतों से जूझ रही है।