चेयरमैन के इस्तीफे से मचा हड़कंप, शेयर 17% टूटा
HDFC Bank के लिए मार्च 2026 का महीना काफी उथल-पुथल भरा रहा। बैंक के चेयरमैन अ تنو चक्रवर्ती (Atanu Chakraborty) ने 'एथिकल' चिंताओं का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया, जिससे शेयर बाजार में हड़कंप मच गया। इस खबर के चलते बैंक के शेयर में करीब 17% की भारी गिरावट आई, और इसका मार्केट कैप ₹1 लाख करोड़ से भी ज्यादा घटकर ₹13.66 लाख करोड़ से ₹12.61 लाख करोड़ पर आ गया। महीने के अंत तक, यानी 30 मार्च 2026 को, शेयर अपने 52-week low ₹726.65 के स्तर को छू गया।
सस्ते दाम पर डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स की बड़ी खरीदारी
शेयरों में आई इस तेज गिरावट ने डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) के लिए एक बड़ा मौका पैदा किया। खासकर म्यूचुअल फंड्स ने मार्च के दौरान करीब ₹17,250 करोड़ के शेयर खरीदे। इस दौरान ICICI Prudential Mutual Fund ने ₹5,073 करोड़, SBI Mutual Fund ने ₹2,706 करोड़ और Nippon India Mutual Fund ने ₹2,145 करोड़ का निवेश किया। इस भारी डोमेस्टिक खरीदारी ने विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के दबाव को काफी हद तक कम किया।
वैल्यूएशन (Valuation) मेंटेन, फिर भी पीयर्स (Peers) से महंगा
बाजार में बिकवाली के बावजूद, HDFC Bank ने अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन (Premium Valuation) बनाए रखा। मार्च 2026 में, HDFC Bank का फॉरवर्ड P/E रेशियो (Forward P/E ratio) लगभग 22x था, जो ICICI Bank (18x), Axis Bank (16x), और State Bank of India (12x) जैसे बैंकों से काफी ज्यादा है। गिरावट की वजह भावनाएं (Sentiment) ज्यादा थीं, न कि फंडामेंटल (Fundamental) कमजोरियां, जिसने डोमेस्टिक निवेशकों को आकर्षित किया।
RBI की क्लीन चिट से बढ़ी निवेशकों की हिम्मत
शुरुआती प्रतिक्रिया चेयरमैन के इस्तीफे और इससे जुड़ी गवर्नेंस (Governance) की अटकलों पर आधारित थी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा बयान जारी कर साफ किया कि उन्हें बैंक के संचालन या कंडक्ट (Conduct) में कोई गंभीर चिंता या गवर्नेंस इश्यू (Governance Issue) नहीं मिला है। RBI की इस हरी झंडी ने डर को कम किया और डोमेस्टिक संस्थाओं को बैंक की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने का मौका दिया।
विदेशी निवेशक अभी भी सतर्क
RBI के स्पष्टीकरण और DIIs की जोरदार खरीदारी के बावजूद, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) अभी भी सतर्क नजर आ रहे हैं। मार्च 2026 में, FPIs ने अपनी हिस्सेदारी 47.67% से घटाकर 44.05% कर ली। यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक अभी भी लीडरशिप (Leadership) या गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों के प्रति आशंकित हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) ने भले ही मजबूत फंडामेंटल के चलते रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन इस घटनाक्रम का असर शेयर की रिकवरी की गति पर पड़ सकता है।