HDFC Bank ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR) में कुछ अहम बदलाव किए हैं, जो 7 मई 2026 से लागू होंगे। इस फेरबदल का मतलब है कि कुछ छोटे अवधि वाले लोन अब सस्ते हो जाएंगे, जबकि लंबी अवधि वाले लोन महंगे होंगे।
खास तौर पर, ओवरनाइट (overnight) और 1-महीने की अवधि वाले लोन पर MCLR को 5 बेसिस पॉइंट (bps) घटाकर 8.05% कर दिया गया है, जो पहले 8.10% था। इसी तरह, 3-महीने और 6-महीने की MCLR दरों को भी कम किया गया है, जो अब क्रमशः 8.15% और 8.30% हो गई हैं। इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को होगा जो छोटे लोन लेना चाहते हैं।
दूसरी तरफ, बैंक ने 3-साल की अवधि वाले लोन के लिए MCLR को 5 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 8.60% कर दिया है। यह उन कॉरपोरेट लोन और कुछ होम लोन के लिए महंगा साबित होगा जो 3-साला बेंचमार्क से जुड़े हैं। 1-साल और 2-साल की MCLR दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, ये क्रमशः 8.35% और 8.45% पर स्थिर हैं।
इस डबल-मूव (double move) से HDFC Bank अपनी फंड की लागत को संतुलित करने और लोन पोर्टफोलियो को मैनेज करने की कोशिश कर रहा है। छोटी अवधि की दरों को घटाकर बैंक नए ग्राहकों को आकर्षित करना चाहता है, वहीं 3-साला दर बढ़ाकर लंबी अवधि की लागत को नियंत्रित कर रहा है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दूसरे भारतीय बैंक भी अपनी-अपनी रणनीतियां अपना रहे हैं। हाल ही में, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने कई अवधियों के लिए अपनी दरें 10 बेसिस पॉइंट कम की थीं, जबकि ICICI Bank ने अपनी दरों को स्थिर रखा था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फिलहाल अपनी रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है और महंगाई व ग्रोथ पर नजर रख रहा है।
HDFC Bank का शेयर, जिसकी मार्केट कैप करीब ₹14.23 ट्रिलियन है और P/E रेश्यो लगभग 16.04x है, आमतौर पर ऐसी MCLR बदलावों पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दिखाता। विश्लेषकों का HDFC Bank पर नजरिया ज्यादातर सकारात्मक है, जिसमें औसत टारगेट प्राइस लगभग ₹1,022.60 है, जो लगभग 30.78% की अपसाइड का संकेत देता है। ज्यादातर एनालिस्ट इसे 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की सलाह दे रहे हैं, हालांकि कुछ 'रिड्यूस' (Reduce) की भी सलाह दे रहे हैं।
हालांकि यह रणनीति लागतों को प्रबंधित करने और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए है, इसमें कुछ जोखिम भी हैं। 3-साला MCLR बढ़ाने से लंबी अवधि के लोन की मांग कम हो सकती है, खासकर अगर प्रतिस्पर्धी बैंक बेहतर दरें पेश करते हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि अप्रैल 2024 में HDFC Bank की 3-साला MCLR 9.35% थी, जो लंबी अवधि के लेंडिंग कॉस्ट पर फोकस में बदलाव का संकेत देता है।
