पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे से उठे गवर्नेंस के सवाल
HDFC Bank के पार्ट-टाइम चेयरमैन, Atanu Chakraborty के इस्तीफे ने बैंक के गवर्नेंस और एथिक्स पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। उनके इस बयान के बाद कि बैंक की कुछ प्रैक्टिस उनके मूल्यों से मेल नहीं खातीं, खासकर AT-1 बॉन्ड की गलत बिक्री (misselling) के मामले में, फोकस ऑपरेशनल नंबर्स से हटकर बैंक की इंटीग्रिटी (integrity) पर आ गया है।
मूल्यों में टकराव और बॉन्ड मिससेलिंग का जिक्र
Chakraborty ने 18 मार्च, 2026 को इस्तीफा दिया था। उनका कहना था कि पिछले दो साल से बैंक की कुछ अंदरूनी प्रैक्टिस उनके मूल्यों के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने बाद में बैंक के मैनेजमेंट की आलोचना की कि उन्होंने AT-1 बॉन्ड की खाड़ी देशों के ग्राहकों को हुई गलत बिक्री को एक 'तकनीकी समस्या' बताकर खारिज कर दिया, जबकि यह एक कंडक्ट (conduct) यानी आचरण का मुद्दा था। रेगुलेटर्स द्वारा चिंता जताए जाने के आठ साल बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। Chakraborty ने जोर दिया कि इंसेंटिव स्ट्रक्चर (incentive structures) और मैनेजमेंट की निगरानी जमाकर्ताओं और शेयरधारकों के हितों के साथ संरेखित (align) होनी चाहिए, एक ऐसा सिद्धांत जिसे वह यहां प्रभावित मानते थे। उन्होंने बैंक के कम शेयर प्राइस, कमजोर CASA डिपॉजिट्स और हाई कॉस्ट-टू-इन्कम रेशियो को भी योगदान देने वाले फैक्टर बताया, और बैंक के रिस्क मैनेजमेंट व एथिक्स के प्रति नजरिए पर सवाल उठाए।
इस्तीफे पर असहमति, RBI का रुख
Chakraborty ने मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) Sashidhar Jagdishan के इस दावे का खंडन किया कि उनका इस्तीफा AT-1 बॉन्ड से संबंधित नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इस्तीफे के पत्र में "बड़े गवर्नेंस इश्यूज" (larger governance issues) का जिक्र था। उन्होंने MD के साथ व्यक्तिगत मतभेदों या उनके री-अपॉइंटमेंट को लेकर चिंताओं को "बढ़ा-चढ़ाकर" बताया। बैंक ने Chakraborty के इस्तीफे के पत्र की समीक्षा के लिए बाहरी लॉ फर्मों को नियुक्त किया, जिसे Chakraborty ने केवल एक "कंप्लायंस एक्सरसाइज" (compliance exercise) करार दिया। इन आंतरिक समीक्षाओं और Chakraborty के मजबूत दावों के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा कि उसे HDFC Bank के आचरण या गवर्नेंस को लेकर कोई "खास चिंता" (material concerns) नहीं मिली है, जिससे सिस्टम में तत्काल घबराहट को कम करने का प्रयास किया गया।
मार्केट की चिंताएं, स्टॉक में भारी गिरावट
मार्केट की प्रतिक्रिया तेज रही, HDFC Bank के शेयर की कीमत में खासी गिरावट आई। अनुमानों के मुताबिक, इस घोषणा के बाद बैंक का मार्केट वैल्यूएशन करीब $21 बिलियन कम हो गया। 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक, शेयर 24% से अधिक गिर चुका है, जो अपने साथियों जैसे ICICI Bank (+7% YTD), Axis Bank (+4% YTD), और State Bank of India (+11% YTD) की तुलना में काफी खराब प्रदर्शन है। Nifty Bank इंडेक्स में तेजी आई है, लेकिन HDFC Bank के अपने मुद्दों ने इसके प्रदर्शन को नीचे खींचा। 25 मार्च, 2026 को RBI द्वारा ओपन फॉरेन एक्सचेंज पोजीशन पर लगाए गए कड़े नियमों ने भी अतिरिक्त बाजार दबाव डाला।
ग्रोथ और मार्जिन पर चिंताएं
चेयरमैन के इस्तीफे के अलावा, कुछ गहरी संरचनात्मक समस्याएं भी सामने आ रही हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) लोन विस्तार की तुलना में धीमी डिपॉजिट ग्रोथ (deposit growth) की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसके कारण लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो 100% के करीब पहुंच गया है, जो फंडिंग और लिक्विडिटी (liquidity) पर दबाव बना रहा है। Q1 FY26 में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) भी पिछली तिमाही की तुलना में कम हुए, हालांकि FY2026 के बाद धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है। इसके कारण एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। जहां कुछ आकर्षक वैल्यूएशन (valuation) और मजबूत फंडामेंटल्स (fundamentals) के कारण "Buy" रेटिंग बनाए हुए हैं, वहीं कुछ ने डाउनग्रेड किया है। Weiss Ratings ने HDFC Bank को "Sell" रेटिंग दी है, और औसत एनालिस्ट रेटिंग "Reduce" की ओर बढ़ गई है। बैंक के खराब प्रदर्शन, जिसमें उसका स्टॉक प्राइस और कॉस्ट-टू-इन्कम रेशियो शामिल है, को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जैसा कि Chakraborty ने भी नोट किया था।
चुनौतियों के बीच बंटे हुए एनालिस्ट्स
गवर्नेंस की बाधाओं और स्टॉक के खराब प्रदर्शन के बावजूद, कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स (market participants) आशावादी बने हुए हैं। Jefferies जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने ₹1,240 के प्राइस टारगेट के साथ "Buy" रेटिंग बरकरार रखी है, जो बड़ी तेजी का संकेत देती है और उनका तर्क है कि हालिया गिरावट ने बैंक के फंडामेंटल्स को ओवरसोल्ड (oversold) कर दिया है। BofA Securities और Bernstein ने भी क्रमशः ₹1,175 और ₹1,150-1,200 के प्राइस टारगेट के साथ "Buy" और "Outperform" रेटिंग्स को बनाए रखा है। एनालिस्ट्स अगले साल के लिए लगभग 9.57% की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, और अगले 12.1% की दर से अर्निंग्स बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि रेवेन्यू में गिरावट का अनुमान है। मार्च 2026 के अंत तक बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹11.26-11.64 ट्रिलियन था, जिसका P/E रेशियो 14.55x से 15.93x के बीच था। भविष्य का आउटलुक बैंक की मर्जर सिनर्जी (synergies) को एकीकृत करने, डिपॉजिट जुटाने और सबसे महत्वपूर्ण, मजबूत गवर्नेंस और एथिक्स दिखाकर निवेशकों का भरोसा बहाल करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।