HDFC Bank ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार को तीन साल के लिए अपना पार्ट-टाइम चेयरमैन बनाने का ऐलान किया है। यह नियुक्ति रेगुलेटरी अप्रूवल के अधीन है। यह कदम पिछले कुछ समय से चल रही गवर्नेंस चिंताओं को दूर करने और सीनियर मैनेजमेंट को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या हुआ?
HDFC Bank ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और फाइनेंस सेक्रेटरी रहे राजीव कुमार को बैंक का नया पार्ट-टाइम चेयरमैन बनाने की घोषणा की है। उनकी तीन साल की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी पर निर्भर करेगी। इसके साथ ही, बैंक के बोर्ड ने उन्हें चार साल के लिए एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर भी नॉमिनेट किया है, जिस पर शेयरधारकों की मुहर 5 अगस्त, 2026 को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में लगेगी।
इस बड़ी नियुक्ति के अलावा, बैंक अपने टॉप मैनेजमेंट में कुछ और अहम बदलाव कर रहा है। सितंबर 2026 में पुणेत शर्मा चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO)-डेजिग्नेट के तौर पर जॉइन करेंगे, और अगस्त 2026 में जिगर शाह जनरल काउंसिल (GC)-डेजिग्नेट के तौर पर बैंक से जुड़ेंगे। ये कदम बैंक के टॉप मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को नया रूप देने की कवायद का हिस्सा हैं।
गवर्नेंस की चिंताओं पर क्या?
पिछले एक साल से गवर्नेंस (Governance) निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रही है। यह नई नियुक्ति बैंक द्वारा शुरू की गई एक इंडिपेंडेंट लीगल रिव्यू के बाद हुई है। इस रिव्यू में पूर्व चेयरमैन अ تنु चक्रवर्ती के रेजिग्नेशन लेटर में उठाए गए आरोपों की जांच की गई थी। बैंक के अनुसार, लीगल रिव्यू में इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला। ऐसे में, फाइनेंस सेक्टर के अनुभवी पूर्व सरकारी अधिकारी को लाकर, बैंक स्थिरता और स्पष्ट नेतृत्व का संकेत देना चाहता है।
स्टॉक और फाइनेंशियल स्थिति
HDFC Bank के शेयर पिछले 12 महीनों में करीब 20.7% गिरे हैं। यह प्रदर्शन Nifty 50 इंडेक्स के 6.2% के गिरावट से काफी पीछे रहा है। करीब ₹12.3 लाख करोड़ के मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ, HDFC Bank भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम की एक बड़ी इकाई बना हुआ है।
ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने बैंक पर भरोसा जताते हुए 'Buy' रेटिंग और ₹1,050 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। एनालिस्ट्स अक्सर लीडरशिप में निरंतरता को महत्व देते हैं, और मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन के नेतृत्व में हो रहे इन नियुक्तियों को बैंक के लॉन्ग-टर्म मैनेजमेंट फ्रेमवर्क पर फोकस करने का संकेत माना जा रहा है।
निवेशक क्यों नजर रख रहे हैं?
निवेशकों के लिए, सबसे बड़ा सवाल इस ट्रांज़िशन (Transition) प्रोसेस का है। हालांकि बोर्ड ने ये नियुक्तियां कर दी हैं, लेकिन राजीव कुमार के चेयरमैन का पद संभालने से पहले RBI की फाइनल अप्रूवल जरूरी है। इसके अलावा, आने वाली AGM भी एक अहम इवेंट होगी, क्योंकि शेयरधारकों को उनके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी देनी होगी।
निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि नए CFO-डेजिग्नेट और जनरल काउंसिल-डेजिग्नेट अपनी भूमिकाओं में कैसे सेटल होते हैं। इन अहम फाइनेंशियल और लीगल पदों पर स्मूथ ट्रांज़िशन, खासकर ऐसे समय में जब गवर्नेंस पर बाजार में चर्चा हो रही थी, निवेशक का भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
