HDFC Bank में लीडरशिप बदलने वाली है। 27 अक्टूबर, 2026 से Anup Bagchi नए MD और CEO का पद संभालेंगे। उनके सामने क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो सुधारने और गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियों को हल करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
लीडरशिप में बड़ा बदलाव
HDFC Bank एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ICICI ग्रुप के अनुभवी चेहरे रहे Anup Bagchi को बैंक का नया मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नियुक्त किया गया है। वे 27 अक्टूबर, 2026 से 3 साल के कार्यकाल के लिए कार्यभार संभालेंगे। RBI ने भी इस नियुक्ति पर मुहर लगा दी है। वे वर्तमान प्रमुख शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे, जिन्होंने नया कार्यकाल लेने से मना कर दिया था। Anup Bagchi ने 2 अक्टूबर, 2026 को ही बैंक के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर के तौर पर एंट्री कर ली थी।
नई रणनीति की तलाश
बैंक का बोर्ड अब 'पर्सनालिटी-ड्रिवेन' मैनेजमेंट से हटकर एक 'इंस्टीट्यूशन-लेड' मॉडल की ओर बढ़ना चाहता है। बैंक में हालिया समय में जो लीडरशिप की अनिश्चितता देखी गई थी, उसे खत्म करना नई मैनेजमेंट की पहली प्राथमिकता होगी। बोर्ड को उम्मीद है कि Bagchi के आने से इंटरनल कल्चर सुधरेगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया में जो बिखराव था, वह दूर होगा।
बैलेंस शीट और गवर्नेंस की चुनौती
नए CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक का बैलेंस शीट मैनेजमेंट है। वर्तमान में बैंक का क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो 90% के पार बना हुआ है। इसे सुधारने के लिए बैंक को अब कम लागत वाली (low-cost) डिपॉजिट जुटाने पर जोर देना होगा, ताकि महंगे होलसेल फंडिंग पर निर्भरता कम की जा सके और प्रॉफिट मार्जिन सुरक्षित रहे।
इसके अलावा, गवर्नेंस के मोर्चे पर भी बैंक को कड़ी मशक्कत करनी है। साल 2026 में चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का इस्तीफा और UAE में क्रेडिट सुइस के AT1 बॉन्ड्स की गलत बिक्री के आरोपों ने निवेशकों का भरोसा हिलाया है।
बाजार की उम्मीदें
इस लीडरशिप उथल-पुथल के कारण HDFC Bank के शेयर लगातार दबाव में रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत में शेयर ₹721.20 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो अपने 52-वीक हाई से काफी नीचे है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह नया मैनेजमेंट अनुपालन (compliance) से जुड़े सवालों को सुलझा पाएगा और बैंक की ग्रोथ स्टोरी को वापस पटरी पर ला पाएगा।
