HDFC Bank के शेयरों में आई ताबड़तोड़ बिकवाली ने इसके वैल्यूएशन मेट्रिक्स (Valuation Metrics) को ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। इसी वजह से अब एनालिस्ट्स (Analysts) इस बैंकिंग दिग्गज के निवेश की अपील का फिर से मूल्यांकन कर रहे हैं। लीडरशिप और मर्जर इंटीग्रेशन (Merger Integration) की तात्कालिक चिंताओं से परे, यह देखना बाकी है कि क्या मौजूदा शेयर की कीमत सच्ची अंडरवैल्यूएशन (Undervaluation) को दर्शाती है या यह गहरे स्ट्रक्चरल चैलेंजेस (Structural Challenges) का संकेत देती है।
एनालिस्ट्स की राय और टारगेट
इस साल अब तक HDFC Bank के स्टॉक में 24% की भारी गिरावट आई है, जो Nifty 50 की 13% की गिरावट और ICICI Bank के 8% की गिरावट से कहीं ज्यादा है। इस तेज गिरावट ने HDFC Bank के प्राइस-टू-बुक (P/B) रेशियो को 16 साल के निचले स्तर, यानी 1.5x (FY28 अनुमानित) पर ला दिया है। इस कम वैल्यूएशन ने बड़े ब्रोकरेज फर्मों का ध्यान खींचा है। JPMorgan ने HDFC Bank को 'Neutral' से 'Overweight' पर अपग्रेड किया है और ₹1,010 का टारगेट प्राइस दिया है, जो 33% के अपसाइड का संकेत देता है। फर्म ने क्रेडिट ग्रोथ में सुधार, कम लागत वाली डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न और बैंक की मजबूत एसेट क्वालिटी (Asset Quality) व फंडिंग बेस का हवाला दिया है। वहीं, Jefferies ने 'Buy' रेटिंग और ₹1,240 का टारगेट बरकरार रखा है, जो 64% के संभावित उछाल का संकेत देता है। फर्म का कहना है कि स्टॉक अनुमानित FY27 एडजस्टेड बुक वैल्यू पर 1.6x और P/E पर 13x पर ट्रेड कर रहा है, जो कई बड़े प्राइवेट बैंक साथियों की तुलना में डिस्काउंट पर है, जिससे वैल्यूएशन आकर्षक हो गया है। शुक्रवार को शेयर ₹757.95 पर बंद हुआ, जो पांच हफ्तों की लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा। हालिया ट्रेडिंग में कीमतों में गिरावट के साथ ऊंचे वॉल्यूम (Volume) देखे गए।
इंडस्ट्री का संदर्भ और मर्जर का प्रभाव
भारतीय बैंकिंग सेक्टर ग्रोथ के लिए तैयार है, जहां FY27 में रिटेल डिमांड और MSME लेंडिंग (Lending) से क्रेडिट ग्रोथ 13-14.5% रहने की उम्मीद है। HDFC Bank का मौजूदा P/E रेशियो करीब 15.3x है, और मार्केट कैप लगभग ₹11.64 लाख करोड़ है। तुलनात्मक रूप से, HDFC Bank अब 12 महीने के फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक बेसिस पर ICICI Bank से 17% डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है, जो ऐतिहासिक प्रीमियम से एक बड़ा बदलाव है। जुलाई 2023 में HDFC Limited के साथ हुए मर्जर के बाद, बैंक का CASA रेशियो HDFC Ltd की उच्च लागत वाली टर्म डिपॉजिट (Term Deposits) को शामिल करने के कारण 38% से घटकर 34% हो गया था। हालांकि, 31 दिसंबर, 2025 तक सकल एडवांस (Gross Advances) 11.9% बढ़कर ₹28,446 बिलियन हो गया। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) भी 31 दिसंबर, 2025 तक 19.9% था, जो रेगुलेटरी न्यूनतम 11.9% से काफी ऊपर है।
संभावित जोखिम
इन अपग्रेड्स के बावजूद, कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। लीडरशिप में बदलाव और गवर्नेंस (Governance) को लेकर अनिश्चितता रही है। मर्जर के बाद इंटीग्रेशन, खासकर उच्च लागत वाली डिपॉजिट को CASA बैलेंस शीट में शामिल करना, थोड़ा जटिल रहा है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं, खासकर अनसिक्योर्ड कंज्यूमर फाइनेंस (Unsecured Consumer Finance) और माइक्रोफाइनेंस लोन (Microfinance Loans) में।
आउटलुक
कुल मिलाकर, एनालिस्ट्स का रुख वैल्यूएशन को देखते हुए सावधानीपूर्वक आशावादी है, लेकिन यह लीडरशिप फैसलों और पोस्ट-मर्जर इंटीग्रेशन की सफलता पर निर्भर करेगा। JPMorgan के अनुमान बताते हैं कि निकट अवधि की लाभप्रदता (Profitability) को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं।