HDFC Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों ने फिस्कल ईयर 26 में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। ऐसा डिजिटल ऑटोमेशन की मदद से हुआ है, जिससे रूटीन काम आसान हो गए हैं। स्टाफ कम होने के बावजूद, इन बैंकों ने अपनी फिजिकल ब्रांच का नेटवर्क बढ़ाया है ताकि 'डिजिटल-फिजिकल' (Phygital) बैंकिंग मॉडल को सपोर्ट किया जा सके। इस कदम का मकसद ऑपरेशनल कॉस्ट कम करना और स्टाफ को ज्यादा वैल्यू वाले एडवाइजरी और सेल्स रोल पर फोकस करना है।
डिजिटल ऑटोमेशन का कर्मचारियों पर असर
भारत के बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक अब अपनी ह्यूमन रिसोर्स स्ट्रेटेजी को नया रूप दे रहे हैं। वे कर्मचारियों की कुल संख्या तो कम कर रहे हैं, लेकिन साथ ही फिजिकल ब्रांच का नेटवर्क बढ़ा रहे हैं। यह 'Phygital' (फिजिकल + डिजिटल) मॉडल का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद डिजिटल प्लेटफॉर्म की एफिशिएंसी को फिजिकल ब्रांचों की भरोसेमंद सर्विस के साथ जोड़ना है।
इस बदलाव की मुख्य वजह ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल है। लोन एप्लीकेशन प्रोसेस करना, नया अकाउंट खोलना और बेसिक कस्टमर सपोर्ट जैसे काम अब ज्यादातर डिजिटल सिस्टम संभाल रहे हैं। इन रिपीटिटिव कामों को टेक्नोलॉजी को सौंपकर, बैंक ऑपरेशनल कॉस्ट घटा पा रहे हैं और प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ा रहे हैं। इसके चलते, बचे हुए ब्रांच स्टाफ को डायरेक्ट सेल्स और स्पेशलाइज्ड एडवाइजरी सर्विसेज पर फोकस करने के लिए कहा जा रहा है, जिनसे प्रति कस्टमर रेवेन्यू बेहतर मिलता है।
बड़े लेंडर्स में कर्मचारियों की स्थिति
देश का सबसे बड़ा प्राइवेट लेंडर, HDFC Bank, फिस्कल ईयर 2026 के अंत में 2,11,178 कर्मचारियों के साथ खड़ा था, जो पिछले साल के मुकाबले 3,343 कर्मचारियों की शुद्ध कमी दर्शाता है। डेटा के मुताबिक, नॉन-सुपरवाइजरी रोल्स में 8,153 की बड़ी गिरावट देखी गई, हालांकि मैनेजमेंट लेवल की पोजीशन में बढ़ोतरी से इसे कुछ हद तक मैनेज किया गया। जूनियर मैनेजमेंट रोल्स में 3,543 और मिडिल मैनेजमेंट में 1,252 की बढ़ोतरी हुई। स्टाफ कम होने के बावजूद, बैंक ने 234 नई ब्रांचें खोलकर अपना फिजिकल नेटवर्क बढ़ाया, जिससे मार्च 2026 तक कुल ब्रांचों की संख्या 9,689 हो गई।
Axis Bank ने भी इसी राह पर चलते हुए पिछले साल के 1,04,453 के मुकाबले 1,01,300 कर्मचारी बताए। यह कमी 22.4% के एट्रिशन रेट के साथ हुई, जो बैंक स्टाफ के बीच काफी मूवमेंट का संकेत देता है। इसके बावजूद, Axis Bank ने 399 नई ब्रांचें जोड़ीं, जिससे उनके नेटवर्क में कुल 6,278 ब्रांचें हो गईं। Kotak Mahindra Bank ने भी ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर ध्यान दिया और 1,269 कर्मचारियों को कम करने के बाद साल के अंत में 74,054 कर्मचारी बताए, साथ ही 128 नई ब्रांचें खोलकर अपना नेटवर्क 2,276 तक फैलाया।
बैंकिंग ऑपरेशंस का भविष्य
यह ट्रांजीशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनरेटिव AI के इंटीग्रेशन पर काफी हद तक निर्भर करता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि ये टूल्स कम वैल्यू वाले बैंकिंग एक्टिविटीज को काफी हद तक ऑटोमेट कर सकते हैं। हालांकि, इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक अपने मौजूदा कर्मचारियों को ज्यादा जटिल कस्टमर नीड्स को संभालने के लिए कितनी प्रभावी ढंग से री-स्किल कर पाते हैं। इन्वेस्टर्स इस बात पर गौर करेंगे कि क्या ये कॉस्ट-सेविंग मेजर्स सीधे बेहतर प्रॉफिट मार्जिन में तब्दील होते हैं और बैंक सर्विस क्वालिटी बनाए रखते हुए अपने फिजिकल और डिजिटल फुटप्रिंट को कैसे स्केल करते हैं।
