HDFC Asset Management Company (HDFC AMC) के MD और CEO नवनीत मुनोट ने चेतावनी दी है कि जूनियर स्टाफ की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लाना खतरनाक हो सकता है। उनका मानना है कि भविष्य के लीडर्स को तैयार करने के लिए ह्यूमन मेंटरशिप और अनुभव जरूरी है, जिसे सिर्फ मशीनों से रिप्लेस नहीं किया जा सकता।
ह्यूमन जजमेंट का महत्व क्यों है?
एसेट मैनेजमेंट का पूरा बिजनेस ह्यूमन एक्सपीरियंस और सही फैसले लेने पर टिका है। मुनोट के अनुसार, एक फंड मैनेजर के गुण तब विकसित होते हैं जब वह सीनियर प्रोफेशनल्स को मार्केट के अलग-अलग उतार-चढ़ाव संभालते हुए देखता है। अगर कंपनियां जूनियर एनालिस्ट्स की भर्ती कम कर देंगी, तो भविष्य में अनुभवी लीडर्स की भारी कमी हो जाएगी। निवेशकों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि लंबी अवधि में फंड की परफॉर्मेंस बनाए रखने के लिए यह 'इंस्टीट्यूशनल नॉलेज' अनिवार्य है।
बढ़ रहा है मार्केट का दायरा
भारतीय कैपिटल मार्केट बहुत तेजी से बड़ा और जटिल हुआ है। एक दशक पहले जहाँ इन्वेस्टमेंट फर्म्स को लगभग 100 कंपनियों पर नजर रखनी होती थी, आज यह संख्या बढ़कर करीब 500 हो गई है। आईपीओ (IPO) के जरिए बाजार में नई कंपनियां आ रही हैं और डेटा का अंबार बढ़ रहा है। मुनोट का साफ कहना है कि AI को केवल एनालिस्ट्स की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि उन्हें रिप्लेस करने के लिए। बिजनेस और सेक्टर की बारीकियों को समझने के लिए इंसान की सूझबूझ आज भी सबसे अहम है।
एसेट मैनेजर्स के लिए रणनीतिक संकेत
यह मुद्दा अब पूरी फाइनेंशियल इंडस्ट्री में बहस का विषय बन गया है कि आखिर एफिशिएंसी और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी के बीच बैलेंस कैसे बनाया जाए। भले ही ऑटोमेशन से काम की स्पीड बढ़े, लेकिन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का मूल आधार क्लाइंट का भरोसा है, जो फंड मैनेजर की निर्णय क्षमता पर टिका है।
