HDFC Asset Management Company के MD और CEO नवनीत मुनोट का मानना है कि भले ही AI काम की रफ्तार बढ़ा रहा है, लेकिन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग में मानवीय निर्णय क्षमता का कोई विकल्प नहीं है।
क्या AI से खतरा है?
एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर तेजी से बढ़ रहा है। इसे लेकर HDFC AMC के प्रमुख नवनीत मुनोट ने साफ कर दिया है कि AI केवल निवेश की प्रक्रियाओं में एक कैटलिस्ट (Catalyst) का काम कर रहा है, न कि फंड मैनेजर की जगह ले सकता है। उनके मुताबिक, बाजार में होने वाली भारी उथल-पुथल के दौरान जो मानवीय धैर्य और कन्विक्शन (Conviction) चाहिए होता है, उसे मशीनी दिमाग कभी नहीं दोहरा सकता।
एक्टिव फंड्स बनाम पैसिव फंड्स
इन्वेस्टर्स के लिए यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आजकल कम लागत वाले पैसिव फंड्स (Index Funds और ETFs) की लोकप्रियता भारत में काफी बढ़ रही है। ऐसे में एक्टिव फंड मैनेजरों पर अपने फीस को सही साबित करने का दबाव बढ़ा है। मुनोट का तर्क है कि शोर (Noise) और असली निवेश के मौके के बीच फर्क करना सिर्फ इंसान ही जानता है, जो कि मार्केट पैनिक के वक्त सबसे जरूरी कौशल है।
टैलेंट और टेक्नोलॉजी का संतुलन
मुनोट ने इंडस्ट्री को चेतावनी दी है कि केवल लागत बचाने के चक्कर में जूनियर एनालिस्ट की भूमिका को कम नहीं करना चाहिए। एक बेहतरीन फंड मैनेजर बनने में दशकों की मेंटरशिप और अनुभव लगता है। HDFC AMC जैसे बड़े प्लेयर के लिए बड़ी चुनौती यह है कि वे टेक्नोलॉजी में निवेश भी करें और टैलेंट पूल को भी मजबूत बनाए रखें, क्योंकि फंड का प्रदर्शन अंततः शानदार प्रतिभा पर ही निर्भर करता है।
निवेशकों के लिए सीख
भारतीय एसेट मैनेजमेंट सेक्टर अभी एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है। निवेशकों को आने वाली तिमाही नतीजों में यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग मार्जिन को कैसे मैनेज कर रही हैं और क्या उनके एक्टिव इक्विटी स्कीम्स में लगातार इनफ्लो आ रहा है या नहीं।
