HDB Financial Services ने सितंबर तिमाही के लिए अपने शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **34.2%** बढ़कर **₹780 करोड़** पर पहुंच गया है और कंपनी ने **₹2** प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है। हालांकि, मार्जिन में कमी और खराब लोन (bad loans) में हल्की बढ़ोतरी के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली की है, जिससे शेयर **4%** नीचे लुढ़क गया।
HDFC Bank की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस सब्सिडियरी, HDB Financial Services ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई दूसरी तिमाही के वित्तीय आंकड़े पेश किए हैं। सालाना आधार पर कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है, जहां नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 15.6% बढ़कर ₹2,534 करोड़ तक पहुंच गई है। कंपनी ने अपने निवेशकों के लिए ₹2 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है, जिसके लिए 23 अक्टूबर, 2026 की रिकॉर्ड डेट तय की गई है।
निवेशक क्यों हैं सतर्क?
सालाना आंकड़ों में मजबूती के बावजूद, निवेशकों का मूड बाजार में मिले-जुले संकेतों की वजह से खराब रहा। सबसे बड़ी चिंता 'सीक्वेंशियल' (तिमाही-दर-तिमाही) आंकड़ों को लेकर है। कंपनी का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 8.35% से घटकर 8.23% पर आ गया है। मार्जिन में यह गिरावट संकेत देती है कि फंड की लागत बढ़ने या कर्ज देने के मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा का दबाव कंपनी के मुनाफे पर असर डाल रहा है।
इसके अलावा, एसेट क्वालिटी में मामूली गिरावट ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ग्रॉस स्टेज-3 लोन यानी ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) पिछली तिमाही के 2.34% से बढ़कर 2.43% हो गए हैं। हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि के 2.81% से बेहतर है, लेकिन तिमाही आधार पर हुई बढ़ोतरी ने बाजार में सतर्कता बढ़ा दी है।
लोन बुक में ग्रोथ और भविष्य की राह
नकारात्मक संकेतों के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि कंपनी का कुल लोन बुक 11.7% सालाना उछाल के साथ ₹1.24 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि उपभोक्ता और एंटरप्राइज लेंडिंग सेगमेंट में मांग अभी भी बरकरार है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने मार्जिन को कैसे स्थिर करती है और खराब लोन के आंकड़ों को नियंत्रण में कैसे रखती है।
