सरकार और LIC अब IDBI Bank में **60.72%** हिस्सेदारी बेचने के लिए मिली नई फाइनेंशियल बोलियों का आकलन कर रहे हैं। Fairfax और Emirates NBD ने सभी रेगुलेटरी बाधाएं पार कर ली हैं, अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या ये बोलियां सरकार की वैल्यूएशन उम्मीदों पर खरी उतरती हैं।
हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
केंद्र सरकार और Life Insurance Corporation of India (LIC) ने IDBI Bank में अपनी संयुक्त हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को फिर से तेज कर दिया है। योजना के मुताबिक, सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी। यह कदम पिछले प्रयासों के बाद उठाया गया है, जब बोलियां सरकार के 'रिजर्व प्राइस' से कम रह गई थीं।
कौन हैं रेस में?
दो दिग्गज ग्लोबल प्लेयर, Fairfax Financial Holdings और Emirates NBD ने अपनी रिवाइज्ड फाइनेंशियल बोलियां जमा कर दी हैं। अच्छी खबर यह है कि दोनों ही कंपनियों ने Reserve Bank of India (RBI) की कठिन 'फिट एंड प्रॉपर' जांच को पास कर लिया है। साथ ही, Ministry of Home Affairs से जरूरी सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी मिल चुका है, जो इस डील के लिए एक बड़ा पड़ाव था।
क्यों है ये डील खास?
IDBI Bank का सफर अक्टूबर 2022 से शुरू हुआ था। बैंक ने साल 2021 में RBI के 'प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन' (PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकलने के बाद अपनी फाइनेंशियल स्थिति में काफी सुधार किया है। चूंकि बैंक का मुनाफा बढ़ा है और बैलेंस शीट मजबूत हुई है, इसलिए सरकार इसे सस्ते में बेचने के मूड में नहीं है।
निवेशकों के लिए चिंता क्या है?
इन्वेस्टर्स के लिए मुख्य चिंता 'वैल्यूएशन गैप' की है। यदि रिवाइज्ड बोलियां भी सरकार के इंटरनल प्राइस फ्लोर तक नहीं पहुंचती हैं, तो यह ट्रांजैक्शन फिर से अटक सकता है या इसमें देरी हो सकती है। फिलहाल बाजार की नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो बैंक के भविष्य के मैनेजमेंट और ग्रोथ स्ट्रैटेजी को पूरी तरह बदल सकता है।
